पूरे 9 महीने में प्रशांत किशोर बिहार में जीरो से हीरो बन गए। नितिन नवीन की सीट को जीतकर सीधे भाजपा हाईकमान को चैलेंज कर दिया। पूरे देश में बड़ा संदेश भी गया है। 14 नवंबर, 2025 को बिहार चुनाव के नतीजे आए। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। जीत मिलना तो दूर, 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई। ऐसा लगा पीके की राजनीति खत्म, अब बिहार छोड़ देंगे। 9 महीने बाद प्रशांत किशोर ने धमाकेदार वापसी की है।
बिहार बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव 19 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत लिया। बिहार की बांकीपुर बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट रही है। यहां बीजेपी को हमेशा 50% से ज्यादा वोट मिले और कभी नहीं हारी थी। अब प्रशांत किशोर के इस कमबैक के पूरे देश में चर्चे हैं, लेकिन सफलता की अपनी कहानी है।
प्रशांत ने 20 नवंबर 2025 को पश्चिम चंपारन के भितिहरवा आश्रम गए। यहां एक दिन का मौन व्रत रखा। इसे आत्ममंथन का संकेत माना गया। यहां से निकलकर पीके ने 8 फरवरी 2026 से ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ शुरू की। फिर पीके ने ऐलान किया कि अगले 5 साल तक अपनी कमाई का 90% हिस्सा जन सुराज को दान करेंगे। दिल्ली का घर छोड़कर पिछली 20 साल में कमाई गई हर संपत्ति भी पार्टी को देंगे उन्होंने जन सुराज पार्टी से जुड़े हर व्यक्ति से कम-से-कम 1,000 रुपए का सहयोग मांगा। इसके बाद पीके ने पटना का अपना शेखपुरा हाउस बंगला छोड़ दिया। वो बिहार नवनिर्माण आश्रम में आकर रहने लगे। इसे जन सुराज पार्टी के कामकाजों के लिए ही बनाया गया है। अगले विधानसभा चुनाव तक पीके यहीं रहेंगे। करीब 5 एकड़ में बने इस आश्रम में जन सुराज पार्टी के 300 से ज्यादा लोग रहते हैं।
साल- 2025 में पीके ने खुद चुनाव नहीं लड़ा वे पूरे चुनाव में मार्गदर्शक और स्टार प्रचारक बने रहे तब वे नेताओं के बजाय प्रोफेशनल्स से ज्यादा घिरे रहते थे। लेकिन इस बार वो खुद चुनाव में उतरे, नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच दीवार बने प्रोफेशनल्स को पीछे किया। जनसभाओं में बार-बार ‘राइट पीपल, राइट थिंकिंग’ यानी सही लोग, सही सोच का नारा दिया।