सत्ता संघर्ष के 20 साल, 17 अगस्त, 2006 को सई नदी पुल से पहले खुलासा इंडिया के एडिटर इन चीफ पर हुआ था, प्राण घातक हमला
प्रतापगढ़। वक्त बीतते देर नहीं लगती। संयोग की बात देखिये 17 अगस्त, 2006 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन कोतवाली नगर के सई नदी पुल से पहले महुली में संचालित एआरटीओ दफ्तर से लौटते समय अनाज माफियाओं ने खुलासा इंडिया के एडिटर इन चीफ रमेश तिवारी “राज़दार” और उनके परम मित्र स्व लालजी रावत पर जानलेवा हमला किया गया। अनाज माफियाओं को लगा कि यदि अनाज की परिवहन व हैंडलिंग में किये गए घोटाले का पर्दाफाश हो गया तो प्रतापगढ़ के तत्कालीन भाजपा विधायक स्व हरि प्रताप सिंह की विधायकी और नगर पालिका अध्यक्ष का पद खतरे में पड़ सकता है। क्योंकि हरि प्रताप सिंह स्वयं खाद्य रसद विभाग में रजिस्टर्ड ठेकेदार रहे।
वजह अनाज माफियाओं की उन ट्रकों का विवरण जनसूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत मांगने पर किया गया था। क्योंकि ट्रकों के नंबर पर अनाज की परिवहन व हैंडलिंग का ठेका हुआ था, वह नम्बर स्कूटर और मोटरसाइकिल के निकल रहे थे। ऐसे में बड़े घोटाले के पर्दाफाश करने के उदेश्य से देश में बने नए कानून के तहत जगदीश ट्रेवेल्स सहित अन्य ट्रांसपोर्ट के ट्रकों का डिटेल्स लेने महुली में संचालित एआरटीओ दफ्तर अपने मोटरसाइकिल से अपने साथी स्व लालजी रावत के साथ गया था, वहीं से लौटते समय एआरटीओ दफ्तर के पटल प्रभारियों की मुखबिरी से अनाज माफियाओं ने ये जानलेवा हमले को अंजाम दिया।
जानलेवा हमला से रमेश तिवारी “राज़दार” पुनर्जन्म मिला था। उक्त घटना से जीवन में बहुत कुछ सीखने को मिला। घटना के षड्यंत्र कर्ता दो वर्ष पहले सुपुर्द-ए-खाक हो गए। अभी एक षड्यंत्रकारी बचा है। नेताओं और अधिकारियों के ब्यभिचार और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने की वजह से यह घटना घटित हुई थी। अज्ञात बदमाशों द्वारा महुली ARTO दफ्तर से पीछा करके बराछा मोड़ के आगे सई नदी के पुल की चढ़ाई पर गोली मारी गई थी। चार पहिया वाहन से टक्कर मारकर नदी से पहले खड्ड में गिरा दिया गया था। बीबी और बच्चों की भाग्य और साथियों के प्यार एवं माँ बेल्हा देवी की अति कृपा से पुनर्जन्म मिला।
षड्यंत्रकारी अधिकारियों में तत्कालीन डीएम आर एस वर्मा और एसपी प्रेम प्रकाश व तत्कालीन सीओ सिटी पूर्णेन्दु सिंह रहे। तत्कालीन डीएम आर एस वर्मा और एसपी प्रेम प्रकाश रिटायर हो चुके हैं। तत्कालीन सीओ सिटी पूर्णेन्दु सिंह अब पीपीएस से आईपीएस में प्रमोशन पा चुके हैं। अधिकारियों के सहयोग से अनाज माफियाओं ने महुली मंडी से सई नदी के पुल (दो किमी) तक पीछा करके यह जानलेवा हमला किया गया था। घटना के बाद प्रयागराज-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग कई घंटे जाम रहा। तत्कालीन नगर कोतवाल लल्लन शर्मा और रमेश तिवारी “राज़दार” के साथियों एवं शुभचिंतको ने जिला अस्पताल लाकर दोनों को भर्ती कराया था।
तत्कालीन नगर कोतवाल लल्लन शर्मा ने जिला अस्पताल में वादा किया कि तहरीर दीजिये मुकदमा हम लिख देंगे, भले ही हमें कप्तान साहेब सस्पेंड कर देंगे। अपने वादे पर अडिग रहते हुए तत्कालीन नगर कोतवाल लल्लन शर्मा ने कोतवाली नगर में अपराध संख्या- 413/2006 FIR पंजीकृत कर दी, यदपि कि उन्हें कप्तान साहेब द्वारा सस्पेंड कर दिया गया। विवेचना चिलबिला चौकी प्रभारी को दी गई तो उन्हें भी कंधई थाना ट्रांसफर कर दिया गया और उनके स्थान पर एडिशनल एसपी के वाचक हेड कांस्टेबिल एसपी सिंह को चिलबिला चौकी प्रभारी बनाया गया, जो सब इंस्पेक्टर नहीं थे। जबकि नियमतः आईपीसी की धारा- 307 जैसी गंभीर मामले की विवेचना एक सब इंस्पेक्टर ही कर सकता है।
कोतवाली नगर में पंजीकृत अपराध संख्या- 413/2006 को स्पंज कर दिया गया और खुलासा इंडिया के एडिटर इन चीफ रमेश तिवारी “राज़दार” और उनके परम मित्र स्व लालजी रावत पर अपराध संख्या-416/2006 के तहत उसी दिन कुसमी रेलवे फाटक के पास कथित मनगठंत घटना दिखाते हुए तत्कालीन भाजपा विधायक स्व हरि प्रताप सिंह के ख़ास भाजपा नेता विनय प्रताप सिंह उर्फ़ गिरधारी द्वारा सीओ सिटी से मार्क कराकर एक तहरीर दी और उसमें दिखाया गया कि उन्हें सुबह राजगढ़ से शहर आते समय उक्त दोनों लोगों ने गोली मार दी। है न ताज्जुब करने वाली बात ! जो ब्यक्ति किसी को गोली मारेगा वह शहर में दिन भर घूमता रहेगा और शाम को उसे भी गोली मार दी जायेगी।
ऐसी कहानी सिर्फ मूवी में देखने को मिलती हैं। फिलहाल खुलासा इंडिया के एडिटर इन चीफ रमेश तिवारी “राज़दार” पर राजनीतिक दबाव में कई और मुकदमें दर्ज किये गए थे, जिन्हें आरोप पत्र दाखिल होने के बाद माननीय अदालतों में ट्रायल के दौरान सभी मुकदमों में उन्हें बाइज्जत बरी किया गया। इस ब्यवस्था जनित भ्रष्टाचार से लड़ने में उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा और उनका सबसे कीमती समय नष्ट हो गया जिसे वापस नहीं लौटाया जा सकता। यदि इस घटना में उनके साथ कोई अनहोनी हुई होती तो उनका परिवार आज सबसे खराब दशा में रहता। इस घटना से यही सबक मिला कि जाको राखे साईंया, मार सके न कोय।