दिल्ली। देश में अराजकता पैदा करने के उदेश्य से मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाकर उसे स्थिर करने का जो षड्यंत्र देश से लेकर विदेश की धरती पर तैयार किया गया और उसे अमली जामा पहनाने के लिए जंतर मंतर को चुना गया और उस आंदोलन में जेन z के नाम पर जिस तरह फूहड़ प्रदर्शन किया गया और देश के संवैधानिक पदों पर बैठे माननीयों को अपशब्द कहे गये, उसकी जितनी नींद की जाए, वह कम होगी।
देश में अब क्रांति की गंभीरता ऐसे ही मापा जाएगा। अब नए युग के क्रांतिकारी अपने निजी अंगों का विक्टिम कार्ड खेलेंगे। वो जो हजारों साल के देश और धर्म पर अंग-अंग कटवा कर बलिदान करते रहे हैं। उनको आज के भारत के इन युवा क्रांतिकारियों पर गर्व होगा। वो जो अंग्रेजो के अत्याचार के सामने नहीं झुके। भूख, प्यास, जलालत से भरी रातें, बिना अन्न जल ग्रहण किये अंग्रेजों के जेल में गुजारे थे, उन्हें भी गर्व होगा।
कभी ये देश किसी महाराणा प्रताप के स्वाभिमान का रहा होगा। किसी दुर्गादास राठौड़ के जिद का देश रहा होगा। कभी किसी शिवाजी के जुनून का देश रहा होगा। लेकिन आज ये देश इन्हीं मातृभूमि के प्रेमियों का है। झांसी की रानी ने कभी युद्ध भूमि में अपने नवजात शिशु को बांधकर कभी युद्ध को देशभक्ति समझी होगी। कभी कोई नीरा आर्या के स्तन अंग्रजो ने काट दिया था। लेकिन नीरा आर्या अंग्रेजो के आगे नहीं टूटने को ही देश प्रेम समझी होगी।
लेकिन देश में अब क्रांति की परिभाषा बदल गई है। आज के क्रांतिकारी युवाओं और युवतियों का आरोप भी अजीबोगरीब है। दिल्ली पुलिस पर आरोप है कि उसने आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के प्राइवेट पार्ट में नाखून मारा और उनकी ब्रा तक खींची। किसी ने आरोप लगाया कि उसकी नेल पॉलिश दिल्ली पुलिस खराब कर दिया है। हद तो तब हो जाती है जब इन आंदोलन कारियों से मीडिया के लोग पूंछते हैं कि आखिर उनका उदेश्य क्या है ? तब परजीवी आंदोलनकारियों की जुबान पर ताला लग जाता है।