राहुल गांधी की अगुवाई में इंडिया गठबंधन में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। इस दौरान इंडिया गठबंधन के 11 नेताओं की ओर से चुनाव आयोग की कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है…
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में INDIA ब्लॉक के नेता, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पहुंचे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं के साथ मिलकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
अपनी याचिका में, विपक्षी गठबंधन ने ECI के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी पक्षकार बनाया है। CJI ने आर्टिकल 32 के तहत याचिका डालने को कहा था, जिसमें किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों के हनन के किसी मामले मे किसी सरकार या संस्था को प्रतिवादी बनाया जाता है। इन्होंने तीनों चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत तौर पर प्रतिवादी बनाया है।
याचिका में चौदह कमियां ही हैं। मतलब देश में चुतियापा की हद चल रही है। अभिषेक मनु सिंघवी के साथ करीब पांच सौ वकीलों का जत्था प्रदर्शन में था। विपक्ष के पास एक से एक धुरंधर वकील हैं। फिर भी ऐसा हुआ। साफ बात है कि यह जान-बूझ कर किया गया, ताकि यह कहकर हंगामा काटा जाए कि देखो सुप्रीम कोर्ट भी इनसे मिला हुआ है।
दूसरा सबसे मजेदार मामला है कि ग्यारह याचिकाकर्ताओं में से नौं ने वकालतनामे पर हस्ताक्षर ही नहीं किये हैं। वे हैं तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव, सौगत राय, संजय राउत, सुप्रिया सुले, डी राजा, एम ए बेबी, महुआ माझी और ई टी मोहम्मद् बशीर। मतलब यही कि राहुल गाँधी और खड़गे को छोड़कर किसी ने हस्ताक्षर नहीं किया।
मतलब साफ है कि कांग्रेस के साथ विपक्ष हंगामे में बेशक साथ रहे, लेकिन लीगल ग्राउंड पर कोई साथ नहीं। हद दर्जे की दोगलयी देखिये कि खड़गे के पहचान पत्र की फोटोकॉपी ही साफ नहीं है, उसमें उनका नाम तक नहीं पढ़ा जा रहा। उससे भी मजेदार खामी यह रही कि फीस भी 220 रूपये कम जमा की गयी थी। भीख मांग लेते भाई।
इनको करना कुछ भी नहीं है, बस देश में आग लगाना है, झूठ फैलाना है। इतना नंंगा सच भी जिन्हें दिखाई न पड़े, उनको नहीं समझाया जा सकता है। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की अगुवाई में सोमवार शाम को इंडिया गठबंधन का मार्च सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। विपक्ष की लीगल टीम ने चुनाव आयोग की कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
यह याचिका राहुल, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव समेत 11 विपक्षी नेताओं द्वारा दायर की गई है। जिसपर कल यानी मंगलवार को सुनवाई हो सकती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह याचिका 12 अक्टूबर, 2026 को शाम 4:37 बजे फाइल की गई है।
फिलहाल इसकी स्थिति लंबित दिख रही है और इसका केस नंबर डब्ल्यू.पी.(सी) नंबर के तहत दर्ज हुआ है। इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही थी। परन्तु याचिका में कमियों की वजह से आज सुनवाई न हो सकी।
किन 11 सदस्यों ने दाखिल की याचिका?
यह याचिका अकेले राहुल गांधी की नहीं, बल्कि विपक्षी इंडिया गठबंधन के 11 बड़े नेताओं की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए. बेबी, डी. राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रसन्ना एस इस मामले में पैरवी कर रहे हैं।
याचिका में किसे बनाया गया प्रतिवादी?
याचिका में कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें पहला प्रतिवादी भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) है, जबकि अन्य तीन प्रतिवादी चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार , सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं।
याचिका में क्या आरोप और मांग?
याचिका में चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) से जुड़े फैसलों के तरीके को चुनौती दी गई है। इसमें विवादित फैसलों से जुड़ी EC की पूरी फाइलें, एजेंडा, बैठक का विवरण (मिनट्स), नोटिंग और आपत्तियों का खुलासा करने की मांग की गई है। इनमें SIR शुरू करने का 24 जून, 2025 का फैसला और ECINET व ERONET के एक्सेस लॉग भी शामिल हैं। इसमें इस बात की न्यायिक जांच की भी मांग की गई है कि क्या ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून और ‘टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार लिए गए थे।
याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि कोर्ट यह सुनिश्चित करे कि किसी भी वोटर का नाम बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए न हटाया जाए। साथ ही, हटाए गए वोटरों की सूची बूथ-वार प्रकाशित करने और उसमें नाम हटाने के कारण व डेमोग्राफिक जानकारी शामिल करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। इसमें ECINET और ERONET सहित वोटर लिस्ट डेटाबेस में नाम हटाने और बदलावों की ऑडिट के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाने की भी मांग की गई है। याचिका में मामले के निपटारे तक चल रहे SIR पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है।
बिना नोटिस वोटर लिस्ट से किसी का नाम न हटाने की मांग
याचिका में विशेष रूप से कोर्ट से मांग की गई है कि वह ECI को निर्देश दे कि वह यह सुनिश्चित करे कि “स्पेशल इंटेंसिव रिविजन से जुड़ा चुनाव आयोग का हर फैसला 2023 के कानून के अनुसार लिया जाए और उसका विधिवत रिकॉर्ड (मिनट्स) रखा जाए।” इसमें यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि “कानून के अनुसार बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए वोटर लिस्ट से किसी भी वोटर का नाम न हटाया जाए।”
बता दें कि राहुल गांधी पहले भी चुनाव आयोग पर कथित ‘वोट चोरी’ और पक्षपात के आरोप लगाते रहे हैं। अब इस कानूनी लड़ाई के जरिए विपक्ष ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिससे इस मामले पर सबकी नजरें टिकी हैं।