सदर एसडीएम प्रतापगढ़ के रीडर की तहरीर पर कोतवाली नगर में दर्ज हुआ जालसाजी और धोखाधड़ी का मुकदमा
प्रतापगढ़। बहुत जद्दोजहद के बाद सदर एसडीएम प्रतापगढ़ के रीडर राम कुमार रावत ने कोतवाली नगर में तहरीर दी और उनकी तहरीर पर एसडीएम सदर कोर्ट में विचाराधीन वाद संख्या- टी202402570304326 चन्द्रनाथ बनाम सरकार के वाद में कूटरचित प्रविष्टि हेतु दोषी वादी मुकदमा चन्द्रनाथ और सम्बंधित राजस्व कर्मचारियों/अधिकारियों जो साक्ष्यों को कूटरचित करने में संलिप्त रहे के विरुद्ध अपराध संख्या- 0213/2026 दिनांक- 05/04/2026 को भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस), 2023 के तहत जालसाजी व धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराध की धारा- 318 (4), 338, 336 (3) व 340 (2) में मुकदमा पंजीकृत हुआ।
वर्तमान एसडीएम सदर नैंसी सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए एसडीएम सदर कोर्ट में विचाराधीन वाद संख्या- टी202402570304326 चन्द्रनाथ बनाम सरकार अंतर्गत धारा- 38 (2) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के तहत पारित आदेश दिनांक- 21/09/2024 के एक पक्षीय आदेश पर वाज दायरा स्वीकार किया और उस पूरे प्रकरण की गंभीरता को बहुत बारीकी से समझा फिर आदेश किया। प्रभावित पक्ष की मेहनत रंग लाई और उन्हें सफलता मिली और तत्कालीन एसडीएम सदर का आदेश दिनांक- 21/09/2024 शून्य होते ही उनके नाम फिर से अस्तित्व में आ गए।
एसडीएम सदर कोर्ट में विचाराधीन वाद संख्या- टी202402570304326 चन्द्रनाथ बनाम सरकार अंतर्गत धारा- 38 (2) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के तहत एक पक्षीय आदेश जो प्रथम दृष्टया एक पक्ष को लाभान्वित करने के उदेश्य से किया गया था। उक्त वाद में प्रभावित पक्ष की दलील सुनने व समझने के बाद एसडीएम सदर ने तहसीलदार सदर से जाँच कराई तो पूर्व तहसीलदार सदर की आख्या फेंक निकली। तहसीलदार सदर की जाँच के बाद सारा मामला परत दर परत खुलता गया। जब तहसीलदार सदर की आख्या ही फेंक निकल गई तो पूरा मामला उल्टा हो गया।
क्योंकि तत्कालीन एसडीएम सदर ने अपने आदेश दिनांक- 21/09/2024 में लिखा था कि तहसीलदार सदर की आख्या आदेश का अंश भाग होगा। इस तरह जब तहसीलदार सदर की आख्या ही फेंक हो गई तो तत्कालीन एसडीएम सदर का आदेश दिनांक- 21/09/2024 भी संदिग्ध हो गया। कोतवाली नगर के सिविल लाइन पुलिस चौकी क्षेत्र के कटरा रोड़ स्थित आईटीआई कॉलेज के सामने वेशकीमती भूमि पर भूमाफियाओं द्वारा कूट रचना करके अपने हक में आदेश कराने वाले षड्यंत्रकारियों की ब्यूह रचना तो ध्वस्त हो गई।क्योंकि वर्तमान एसडीएम सदर नैन्सी सिंह ने अपने आदेश दिनांक- 19/02/2026 के द्वारा दिनांक- 21/09/2024 को शून्य घोषित कर दिया।
अब यक्ष प्रश्न यह है कि एसडीएम सदर कोर्ट में विचाराधीन वाद संख्या- टी202402570304326 चन्द्रनाथ बनाम सरकार अंतर्गत धारा- 38 (2) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के वाद में चन्द्रनाथ को मुख्य आरोपी माना गया है तो उक्त वाद में वादी का अधिवक्ता क्या इस कूटरचित प्रविष्टि में संलिप्त नहीं रहा ? साथ ही चन्द्रनाथ ने जिन लोगों को एग्रीमेंट किया और जिन लोगों ने आनन-फानन में आगे आकर उक्त वेशकीमती भूमि पर प्लाटिंग करके उसमें सड़क की तरफ दो बैनामा भी कर दिया, क्या वे लोग इस जालसाजी और धोखाधड़ी की कड़ी का हिस्सा नहीं हैं ?
इस जालसाजी और धोखाधड़ी में सबसे बड़ा गुनाह किसी का है तो वह स्वयं तत्कालीन एसडीएम सदर उदय भान सिंह हैं जो सबकुछ जानते हुए एक पक्षीय आदेश किया और उक्त वाद में बिना कोई साक्ष्य और तारीख पेशी के ही मुकदमें में आदेश कर एक पक्ष को लाभ दिलाने का कार्य किया, जिसके आधार पर भूमाफियों ने उक्त भूमि पर जबरन कब्ज़ा किया और उसकी प्लाटिंग करके दो प्लाट को बेंच लेने में सफलता हासिल कर ली। सच बात तो यह है कि तत्कालीन एसडीएम सदर उदय भान सिंह अपने आवास सहित शहर के अंदर आधा दर्जन स्थानों पर अपने प्राइवेट ऑपरेटरों द्वारा एसडीएम सदर कोर्ट का संचालन करते थे और ऐसे ही बिना सिर पैर का आदेश करके धनार्जन करते रहे।