प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी crisis को opportunity में बदलने में माहिर हैं।
हमें मोदी पर भरोसा करना चाहिए। ट्रंप के टैरिफ से पैदा होने वाले संकट को भी सफलता में बदलेंगे।हो सकता है कि साल दो साल मुसीबतों का सामना करना पड़े,हो सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस गति से आगे बढ़ रही है,उसमें रुकावट आए,लेकिन इस समय भारत की अर्थव्यवस्था pressure को झेल सकती है।कोविड का बुरा समय इसका उदाहरण है।भारत ने संकट को अवसर में बदला। इससे पहले 1998 में अमेरिका ने भारत पर sanctions लगाए थे,उस समय हमारी अर्थव्यवस्था बहुत मज़बूत नहीं थी।अब तो भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में चौथे नंबर की economy है।अमेरिका को होने वाला export हमारी GDP का सिर्फ 2 फीसदी है। इसीलिए चिंता करने की ज़रूरत नहीं।भारत का मार्केट हमारी अर्थव्यवस्था की शक्ति है।अमेरिका के लिए भी ये बहुत बड़ा मार्केट है। अगर भारत को टैरिफ से नुकसान होगा तो अमेरिका के हाथ से भी बड़ा मार्केट जाएगा। भारत में तो मान्यता है कि जो होता है अच्छे के लिए होता है।अगर अमेरिका कोई रास्ता बंद करेगा तो दूसरे देशों के बाज़ार भारत के लिए खुलेंगे।ट्रंप के रुख से भारत, रूस और चीन करीब आए हैं।भारत,रूस और चीन की आबादी विश्व की कुल population का 38 फीसदी है।यानी विश्व का 38 फीसदी मार्केट इन तीन देशों के पास है।इसी तरह textiles, pharma, engineering goods, steel और marine products का 30 फीसदी से ज़्यादा मार्केट भारत, रूस और चीन के पास है।अगर ये तीनों देश एक साथ आ जाते हैं तो अमेरिका साइड लाइन हो जाएगा।अमेरिका की दादागीरी खत्म हो जाएगी।