नई दिल्लीः भारत के मुख्य न्यायधीश (CJI) बीआर गवई ने हाल ही में कहा कि न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और उन्हें बुलडोजर न्याय के खिलाफ आदेश पारित करने में बेहद संतुष्टि मिली। उन्होंने कहा कि इस फैसले का श्रेय जस्टिस विश्वनाथन को भी समान रूप से जाता है। इसमें उनका भी बड़ा योगदान है। क्योंकि यह सीधे मानवीय समस्याओं से जुड़ा हुआ था।
गवई चीफ जस्टिस के रूप में करीब छह महीने के कार्यकाल के बाद नवंबर में होंगे, रिटायर
सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं के एक शैक्षणिक समूह, 269वें शुक्रवार समूह में बोलते हुए मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि उन्हें लगभग छह महीने तक न्यायमूर्ति विश्वनाथन के साथ पीठ साझा करने का अवसर मिला। इसके अलावा चीफ जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि CJI के कार्यकाल का न्याय प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि कई चीफ जस्टिस मुश्किल से कुछ महीनों के लिए ही इस पद पर रहे हैं, उन्होंने अपनी ऐसी छाप छोड़ी है, जिसका अनुसरण करना मुश्किल है।
सभ्य समाज में बुलडोजर न्याय अस्वीकार्य
मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि उन्होंने न्याय की बेहतरी और देश भर में न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे में सुधार लाने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया है। इस दौरान पीठ ने अभियुक्तों/दोषियों की संपत्तियों को मनमाने ढंग से ध्वस्त करने की कार्यपालिका की प्रवृत्ति के खिलाफ कई निर्देश पारित किए। इस तरह की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराते हुए पीठ ने कहा कि कानून के शासन द्वारा शासित एक सभ्य समाज में बुलडोजर न्याय अस्वीकार्य है।
CJI बीआर गवई ने बताया क्यों दिया था, इस तरह का फैसला
फैसले को याद करते हुए सीजेआई ने कहा कि मुझे लगता है कि बुलडोजर वाला फैसला हम दोनों के लिए बेहद संतोषजनक था। इस फैसले के मूल में मानवीय समस्याएं और इंसानों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याएं थीं। जिस परिवार को सिर्फ़ इसलिए परेशान किया जा रहा था, क्योंकि वह उस परिवार का हिस्सा था। जिसके सदस्यों में से एक या तो अपराधी था या कथित अपराधी।”
‘जस्टिस विश्वनाथन का बड़ा योगदान’
मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि इस फैसले का श्रेय न्यायमूर्ति विश्वनाथन को भी समान रूप से जाता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हालांकि ज़्यादातर श्रेय मुझे दिया गया है, लेकिन मैं यह भी कहना चाहूँगा कि इस फैसले को लिखने का समान श्रेय न्यायमूर्ति विश्वनाथन को भी जाना चाहिए। इसके अलावा, मुख्य न्यायाधीश गवई ने यह भी कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल का न्याय प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि कई मुख्य न्यायाधीश, जो मुश्किल से कुछ महीनों के लिए ही इस पद पर रहे हैं।