चीखें, सिसकियां और मातम…उंटगन हादसे में 12 की मौत, अंतिम दिन जलीं चार चिताएं
त्योहार से पहले गांव कुसियापुर में मौत ने ऐसा झपट्टा मारा कि 12 लोगों की जान चली गई। युवाओं से लेकर किशोर उटंगन नदी हादसे में मौत की नींद सो गए। इस हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। खेरागढ़ के गांव कुसियापुर में चामड़ माता के मंदिर पर दुर्गा प्रतिमा स्थापना के बाद हंसी खुशी के माहौल पर विसर्जन के दिन हुए हादसे ने परिवारों को दर्द दिया।
किसी के घर का चिराग बुझ गया तो किसी की मांग का सिंदूर उजड़ गया। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। एक सप्ताह पहले तक जहां मंगलगीत गज रहे थे, वहां पर अब करुण क्रंदन ही सुनाई दे रहा है। गांव के हर घर में लोगों की आंखों में आंसू हैं। हादसे के बाद जिसने भी सर्च ऑपरेशन को देखा वह परिवारों का हाल देखकर रोता नजर आया।
कुसियापुर गांव के लोगों का कहना था कि नदी में डूबे 12 युवकों के अपने अलग सपने थे लेकिन उटंगन नदी ने सब कुछ निगल लिया। छह दिन तक चली जद्दोजहद के बाद जब आख़िरी शव बरामद हुआ, तो पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। अपने लाडले बेटे को खोने वाली माताओं की आंखें अपने लाल को खोजती रहीं, बेबस पिता बस नदी की लहरों में उम्मीद तलाशते रहे। जिन गलियों में कभी इन युवाओं की हंसी गूंजती थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है। कुसियापुर गांव ने अपने 12 बेटों को खो दिया और साथ ही खो दिए वो अधूरे सपने, जो अब सिर्फ यादों में जिंदा रहेंगे।