खुलासा इंडिया की खबर का प्रतापगढ़ जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने लिया संज्ञान, पाँच डीजे वाहनों को किया गया सीज

प्रतापगढ़ जिले में डीएम शिव सहाय अवस्थी और एसपी दीपक भूकर के निर्देशन में सड़क सुरक्षा एवं दुर्घटना रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया गया। एडिशनल एसपी (पूर्वी) शैलेन्द्र लाल के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक यातायात सत्येंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान 5 डीजे वाहनों को नियमों के उल्लंघन पर सड़क से उठा कर बंद किया गया।
अभियान का उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना और जनहित में सुरक्षित यातायात व्यवस्था बनाए रखना है। प्रतापगढ़ पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और सड़क सुरक्षा में सहयोग दें। दुर्गापूजा के बाद से शहर में डीजे की मानों बाढ़ सी आ गई हो। मूर्ति विसर्जन के बाद से दशहरा और भरत मिलाप के बाद अलग-अलग बाज़ारों में होने वाले मूर्ति विसर्जन में डीजे संचालकों की प्रतिस्पर्धा ने जनमानस का जीना हराम कर दिया है।
डीजे साउंड पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है। ध्वनि प्रदूषण के सारे मानकों की धज्जियां उड़ाकर साउंड सिस्टम को जानलेवा बना दिया है। पुलिस प्रशासन सिर्फ सड़क सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। ध्वनि प्रदूषण पर ध्यान ही नहीं देते। अत्यधिक ध्वनि के साथ ईको बेस साउंड से मकान तक हिल जाते हैं। शरीर काँपने लगती है। हृदयाघात होने की संभावना बढ़ जाती है। ब्लडप्रेशर और हृदय रोगियों के लिए डीजे के साउंड यमराज साबित हो सकते हैं।
दुर्गा पूजा के प्रारंभ से साउंड सिस्टम से निकलने वाली ध्वनि से लोग आजिज हो जाते हैं। बची खुची कमी विसर्जन के दिन पूरी हो जाती है। पंडालों से माँ दुर्गा जी की प्रतिमा को लेकर उनके भक्त जोश में होश खो बैठते हैं। पांडाल से लेकर विसर्जन स्थल तक जनहानि जैसी कई घटनाएं हो जाती हैं। फिर भी उससे सबक नहीं लेते। प्रतापगढ़ में एक पूजा पांडाल से माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करने गए भक्तों में दो की हाई टेंशन तार की चपेट में आ जाने से मौत भी हो गई थी।
दुर्घटना घटित होने के बाद जिला प्रशासन और बिजली विभाग को दोष दे रहे थे। जबकि मृतक और उनके साथ रहे लोग ही इसके असल दोषी हैं। परन्तु अपनी गलती का एहसास नहीं करते। यही नहीं घटना और दुर्घटना से सबक नहीं लेते। फिर वही गलती दोहराते हैं और ये घटना हर साल घटित होती रहती है। यदि बुद्धिजीवी तबका इसे संज्ञान ले और हुल्लड़बाजी करने वाले लोगों पर दबाव बनाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
पुरानी जीप जिसका रजिस्ट्रेशन भी खत्म, बीमा भी खत्म, प्रदूषण भी खत्म और परमिट भी खत्म वैसे वाहनों को डीजे संचालक परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन को ठेंगा दिखाकर डीजे संचालित करते हैं। एक साल में करोड़ों रुपये की राजस्व चोरी डीजे संचालकों द्वारा की जा रही है। सूत्रों की बातों पर यकीन करें तो डीजे संचालित वाहन चोरी के भी हो सकते हैं। चूँकि जिन वाहनों का कोई वैध कागजात नहीं, वह चोरी के भी हो सकते हैं।
ऐसे में परिवहन और पुलिस विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि जिले में संचालित सभी डीजे संचालकों को नोटिस जारी करें और उनके वाहनों का वेरिफिकेशन करें। जिनके पास वाहन के कागजात न हो उन्हें तत्काल प्रभाव से सीज करें और वाहन को संचालित करने वाले के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए, क्योंकि यह मुद्दा जनहित से जुड़ा हुआ है।