“मैं किसी सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानूंगा”- प्रतापगढ़ जनपद के एक इंस्पेक्टर पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, अवमानना केस में लगाई सुप्रीम फटकार

यह मामला तब सामने आया जब इंस्पेक्टर ने अदालत के आदेश को मानने से साफ इंकार कर दिया था और याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी के साथ मारपीट भी की थी। इसमें सबसे अहम् बात यह रही कि यह गिरफ्तारी सीजीएम प्रतापगढ़ की कोर्ट के एनबीडब्लू के आदेश के बाद कंधई थाना के इंस्पेक्टर गुलाब सिंह सोनकर के आदेश पर साल्हीपुर कंजास में बनी मंदाह पुलिस चौकी पर तैनात सब इंस्पेक्टर मिथिलेश चौरसिया ने की।
प्रतापगढ़ जिले के कंधई थाने के कोतवाल गुलाब सिंह सोनकर पर सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में कड़ी फटकार लगाई है। यह मामला तब सामने आया, जब कोतवाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने से साफ इंकार कर दिया था और याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी के साथ मारपीट भी की थी। ऐसा आरोप याचिकाकर्ता अपनी अवमानना की याचिका में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना 28 मार्च, 2025 की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कोतवाल ने याचिकाकर्ता को उसके कार्यस्थल से घसीटते हुए गिरफ्तार किया था। जब याचिकाकर्ता ने उन्हें कोर्ट का आदेश दिखाया तो कोतवाल ने गाली-गलौज की और कहा, “मैं किसी सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानूंगा, मैं तुम्हारा सारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट आज निकाल दूंगा।”
थाना प्रभारी की कुर्सी मिलने के बाद ज्यादातर लोगों में अहंकार आ जाता है। उनको लगता है कि उनसे बड़ा देश-प्रदेश में कोई है ही नहीं। लेकिन कभी-कभी कोई न कोई जिद्दी और समझदार इंसान से पाला पड़ता है तो इनकी सारी कारस्तानियां बाहर आ जाती है। एक थाना प्रभारी को हटाने और उसके कार्य की लापरवाही को बताने के लिए पीड़ित को सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी थाना प्रभारी नहीं माने।
मामला जब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा कि उसके आदेशों की अवहेलना की गई तो अवमानना के मामले में पुलिस के उच्चाधिकारियों को तलब कर लिया। सुप्रीम कोर्ट में पुलिस और यूपी सरकार अपने दरोगा और कोतवाल की कारस्तानी से परेशान हो गई। सरकार के वकील भी परेशान हैं। क्योंकि जवाब तो उन्हें ही देना है। उन्होंने समय मांगा और फिर अपना पक्ष रखा। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर से पहले कार्रवाई का आदेश दिया है। अब कार्रवाई होनी है।
देर रात एसपी प्रतापगढ़ दीपक भूकर ने उन्हें थाना प्रभारी गुलाब सोनकर को पद से हटा दिया। देखना है कि इन पर क्या कार्रवाई सरकार और एसपी करते हैं। क्योंकि मामला सरकार के संज्ञान में हैं। एडीजी प्रयागराज जोन प्रतापगढ़ आए थे। इस मामले की गोपनीय जांच भी की थी। दोनों पक्षों को तलब किया गया था और सम्बन्धित पुलिस अधिकारी भी तलब हुए थे। दोनों पक्षों को सुनकर पुलिस अधिकारियों के पक्ष सुनकर एडीजी प्रयागराज जोन बंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप दी है।
इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में यह स्पष्ट है कि अधिकारी ने जान-बूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना की है और ऐसे मामलों से सख्ती से निपटना जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि कानून की रक्षा करने वाले अधिकारी अगर खुद न्यायालय की अनदेखी करेंगे तो यह न्याय व्यवस्था पर गहरा प्रहार है।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि इस मामले की जांच एडीजीपी रैंक के अधिकारी से कराई जाए। राज्य सरकार के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि जांच रिपोर्ट के बाद कोतवाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि न्याय के रास्ते में बाधा डालने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 7 नवंबर, 2025 के लिए फिर से सूचीबद्ध किया है।
अब 7 नवंबर, 2025 को जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी। इस घटना ने न केवल यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि देश की सर्वोच्च अदालत अपने आदेशों की अवहेलना पर कितना गंभीर रुख अपनाती है। जनपद प्रतापगढ़ में अधिकांश थाना प्रभारी ऐसे ही हैं, जो माननीय न्यायालय को कुछ समझते ही नहीं। माननीय न्यायालय के आदेश तक को मानना पसंद ही नहीं करते। इनका अपना आदेश होता है। इनका अपना फरमान होता है।