पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में बंद, वकील सड़क परः मेरठ में स्कूल-कॉलेज नहीं खुले, बोले-हाईकोर्ट बेंच मिलने तक रुकेंगे नहीं

पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में बंद का आह्वान किया गया है। यह बंद हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति ने किया है। 22 जिलों के अधिवक्ताओं और 1200 से अधिक संगठन भी हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अपना समर्थन दे रहे हैं। मेरठ में ऐतिहासिक बंद का असर बुधवार सुबह से ही दिखाई देने लगा है। सुबह 11 बजे तक खैरनगर, सुमित बुढ़ाना गेट, जिमखाना मैदान समेत कई इलाकों में दुकानों के शटरों पर ताले लटके रहे। वहीं डॉक्टरों ने भी ओपीडी कैंसिल कर रखी है जबकि इमरजेंसी सेवाएं बहाल है।
वहीं शहर के स्कूल-कालेजों को भी बंद रखा गया है। सुबह से ही वकीलों ने जगह-जगह धरना प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। वकीलों ने कहा- बेंच नहीं तो वोट नहीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर बुधवार को बुलंदशहर में व्यापक बाजार बंद रहा। व्यापारी सुरक्षा फोरम समेत विभिन्न व्यापारी और सामाजिक संगठनों के आह्वान पर जिले के प्रमुख बाजारों में सुबह से ही दुकानें नहीं खुलीं। बंद का असर अंसारी रोड, चौक बाजार और अन्य व्यवसायिक क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। अंसारी रोड, चौक बाजार, काला आम और रामघाट रोड जैसे प्रमुख व्यवसायिक इलाकों में अधिकांश दुकानें सुबह से ही बंद रहीं। सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम चहल-पहल दिखाई दी। व्यापारियों ने अंसारी रोड पर एकत्र होकर नारेबाजी की ।
हापुड़ में वकीलों ने बुधवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने तहसील चौराहे पर जाम लगाकर विरोध दर्ज कराया। धरना-प्रदर्शन और जाम के कारण तहसील चौराहे से गुजरने वाले मार्गों पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए यातायात को वैकल्पिक मार्गों से संचालित कराया। प्रशासन ने वकीलों से बातचीत कर जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन अधिवक्ता अपनी मांग पर अड़े रहे। हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर बिजनौर में वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। रेवेन्यू बार एसोसिएशन के वकीलों ने नारेबाजी करते हुए रजिस्ट्री कार्यालय पर ताला डाल दिया। इसके बाद जिला बार एसोसिएशन के सैकड़ों वकील न्यायालय परिसर में एकत्र हुए और जोरदार नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। कलेक्ट्रेट पहुंचकर वकीलों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
पश्चिम उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर संभल में अधिवक्ताओं ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिवक्ता एकता जिंदाबाद के नारे लगाते रहे। इस दौरान संभल कोतवाली क्षेत्र में जगह-जगह पुलिस और पीएसी को तैनात रही। वेस्ट यूपी में हाई कोर्ट अलग बेंच की मांग को लेकर बागपत में अधिवक्ताओं ने बुधवार को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे जाम कर दिया। अधिवक्ता जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने कलेक्ट्रेट पहुंचे थे, लेकिन डीएम के न मिलने पर वे भड़क गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
नाराज अधिवक्ताओं ने ‘डीएम मुर्दाबाद’ के नारे लगाए और कलेक्ट्रेट के सामने ही दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर सड़क के दोनों ओर यातायात रोक दिया। सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता सड़क पर बैठ गए और डीएम को मौके पर बुलाने की मांग करने लगे। अधिवक्ता डीएम अस्मिता लाल से मुलाकात कर उन्हें हाई कोर्ट बेंच की मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, डीएम के अधिवक्ताओं से न मिलने के कारण उनका गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने प्रदर्शन का रास्ता अपनाया। वकील जुलूस निकालकर मार्केट बंद करा रहे हैं। बैंक, दवा दुकानें छोड़कर अन्य जो भी प्रतिष्ठान खुले हैं उनको बंद कराया जा रहा है।
सफाई मजदूर संघ के महामंत्री कैलाश चंदौला वाल्मीकि ने बताया- बंद में हमारा पूरा सहयोग रहा है, सफाई कर्मियों ने सफाई नहीं की है। हमनें भी व्यापारियों की तरह अपना काम बंद कर सहयोग किया है। सपा के किठौर विधायक और पूर्व मंत्री एडवोकेट शाहिद मंजूर ने कहा- मैं भी मेरठ बार का सदस्य हूं, ये सौभाग्य की बात है कि उस बार के पदाधिकारी पूर्व पीएम भी रहे हैं। कहा-मेरठ से जो आंदोलन शुरू होता है, उसमें 6 महीना भी समय लग जाए लेकिन उस आंदोलन को सफलता जरूर मिली है। उन्होंने कहा- आंदोलन को जनता से जोड़ना पड़ेगा तभी सफलता मिलेगी।
अधिवक्ताओं ने ने पूरा शहर बंद करा दिया है। कचहरी परिसर के सभी गेटों पर अधिवक्ता बैठे हैं और बंदी के लिए सभी का धन्यवाद करते हुए अपना प्रदर्शन किया। उन्होंने कचहरी परिसर में स्थित रजिस्ट्री कार्यालय समेत सभी न्यायालय बंद करा दिए हैं। सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि आज वकीलों के आंदोलन को जनांदोलन बनाया गया है। पूरा मेरठ बंद है। लेकिन इस तरह की बंदी पहले भी रही है। लेकिन आज का बंद केवल मेरठ के लिए नहीं बल्कि पूरे पश्चिमी यूपी के लिए ऐतिहासिक दिन हैं।
मेरा भी एक मुकदमा वहां चल रहा है। उसके लिए मुझे 50 बार जाना पड़ता है। मुझे तो वहां रूकने, आने-जाने की भी दिक्कत नहीं है। लेकिन फिर भी मैं परेशान होता हूं। अगर यहीं ये व्यवस्था रहेगी तो गाढ़ी कमाई का पैसा परेशानी में खर्च नहीं होगा। उन्होंने कहा- मुझे गोरखपुर, प्रयागराज, गोंडा, बस्ती के नहीं बल्कि मेरठ के लोगों ने विधायक बनाया है। मुझे चुनना पड़े तो देश के बाद मेरठ को ही चुनूंगा। ये बेंच किसान, मजदूर और आम जनता का अधिकार है। मैं कहूंगा जिन दलों की आज सरकार है और जिनके पास सरकारी हक है। उन्हें ही जनता साथ नहीं मिल रहा है। जनता को न सेंट्रल मार्केट मिला और न ही हाईकोर्ट बेंच मिला। सरकार नियम बनाए तो सेंट्रल मार्केट भी बचेगी और बेंच भी मिलेगा।