CGST घूसखोरी मामला: डेढ़ करोड़ से एक रुपया कम लेने को तैयार नहीं थीं मैडम
झांसी। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) झांसी में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों और निजी कारोबारियों द्वारा डेढ़ करोड़ की रिश्वतखोरी का मामला सिर्फ पैसों की अदायगी तक सीमित नहीं था, बल्कि एक योजनाबद्ध साजिश थी, जिसमें कई स्तरों पर बातचीत, मुलाकात और दबाव का खेल चला। सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्रर प्रभा भंडारी ने मध्यस्थों से साफ कह दिया था कि रिश्वत की रकम डेढ़ करोड़ से एक रुपये भी कम नहीं होगी। सीबीआई की एफआईआर से यह खुलासा हुआ है।
18 दिसंबर 2025 को CGST टीम ने झांसी के दो बड़े कारोबारियों जय अंबे प्लाईवुड और जय दुर्गा हार्डवेयर के गोदामों पर छापेमारी की। इस दौरान भारी मात्रा में अघोषित स्टॉक और टैक्स उल्लंघन से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए। यह कार्रवाई अधिकारियों के लिए एक मौका बन गई, जहां उन्होंने कानूनी प्रक्रिया को अपने फायदे के लिए मोड़ने की योजना बनाई। छापेमारी के तुरंत बाद अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता ने मध्यस्थता की भूमिका निभाते हुए कारोबारियों से संपर्क किया। उसने भरोसा दिलाया कि वह CGST अधिकारियों से बात करके मामला ‘सेटल’ करवा सकता है।
ऐसे बढ़ा खेल
अधिवक्ता ने अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें बताया कि कारोबारी किसी भी कीमत पर मामला शांत करना चाहते हैं। अधिकारियों ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए यह संदेश दिया कि उनके पास अघोषित स्टॉक और टैक्स चोरी के ठोस सबूत हैं। इस डर को भुनाते हुए उन्होंने रिश्वत की मांग शुरू की। सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी ने नरेश गुप्ता को साफ कहा कि ‘मैडम’ यानी डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी खुद छापेमारी स्थल पर मौजूद हैं और वह किसी भी रियायत के लिए तैयार नहीं हैं। इसके बाद अधिकारियों ने कारोबारी पक्ष को यह संकेत दिया कि मामला निपटाने के लिए बड़ी रकम देनी होगी।
मुलाकातों का सिलसिला
19 दिसंबर को कारोबारी लोकेंद्र तोलानी और राजू मंगतानी ने अनिल तिवारी के घर जाकर बातचीत की। 22 दिसंबर को नरेश गुप्ता और तेजपाल मंगतानी ने अजय शर्मा से मुलाकात की। इन बैठकों में रिश्वत की रकम और भुगतान की प्रक्रिया तय हुई। 23 दिसंबर को राजू मंगतानी को 30 लाख रुपये देने का निर्देश मिला। 25 दिसंबर को उसने जगदीश बजाज से 70 लाख रुपये की व्यवस्था के लिए मदद मांगी। एफआईआर में दर्ज है कि कुल मांग 1.5 करोड़ रुपये की थी, जिसमें से 30 लाख पहले ही दिए जा चुके थे। एफआईआर के मुताबिक ‘मैडम’ प्रभा भंडारी ने रिश्वत की रकम कम करने से इनकार कर 1.5 करोड़ रुपये की मांग पर अड़ी रहीं।