प्रतापगढ़ में घायल पीड़ित व्यक्ति को चार दिन थाने से लौटाया, पुलिस की मनमानी पर एसओ सांगीपुर निलंबित
प्रतापगढ़। मारपीट में घायल पीड़ित की चार दिन तक थाने में सुनवाई नहीं हुई। वह हर दिन आता और लौटा दिया जाता। पुलिस की मनमानी यहीं नहीं खत्म हुई। उसे एक मुकदमे में सह आरोपित भी बना दिया गया। पुलिस की मनमानी की जांच के बाद एसपी ने सांगीपुर थानाध्यक्ष राजेंद्र त्रिपाठी को शनिवार को निलंबित कर दिया।
मारपीट के मामले में पीड़ित ने चार दिन तक थाने पर दस्तक दी। बार-बार आग्रह करता रहा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। वह हर दिन थाने जाने व लौटाए जाने का वीडियो साक्ष्य भी जुटाता रहा। इसी बीच पीड़ित को एक लड़की के भगाए जाने के मामले में सहआरोपित बना दिया गया। इस मनमानी का प्रार्थना पत्र और साक्ष्य लेकर पीड़ित उच्च अधिकारियों से मिला।
सीओ से जांच कराई गई तो शिकायत सही निकली। कुछ और भी शिकायतें इसी तरह की थीं। एसपी ने थाने में सुनवाई न होने को घोर संवेदनहीनता और लापरवाही करार देते हुए कार्रवाई की। एसपी दीपक भूकर ने बताया कि पीड़ितों की सुनवाई में लापरवाही पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। जो भी पुलिस कर्मी पीड़ितों के प्रति बेरुखे रहेंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, एक अन्य मामले में चौकी प्रभारी घुइसरनाथ पर केस दर्ज करने का आदेश दिया गया है। शासन कहता है कि सोशल पुलिसिंग हो। अपराध नियंत्रण में जनता का सहयोग लिया जाए और पीड़ितों से मर्यादित व्यवहार किया जाए, लेकिन चौकी प्रभारी घुइसरनाथ धाम इंद्रेश प्रजापति पर ऐसे निर्देशों को कोई असर नहीं दिख रहा है। उनके खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट पारुल वर्मा ने दिया है।
सांगीपुर के एक गांव की महिला ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वह अनुसूचित जाति की गरीब महिला है। प्रकरण चार जनवरी को रात आठ बजे का है। महिला का चचेरा देवर अपने पिता के साथ आ रहा था। सड़क के किनारे उसकी साइकिल में किसी अज्ञात व्यक्ति ने टक्कर मार दी लेकिन, आपस में परिचित होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई।
थोड़ी देर बाद चौकी इंचार्ज घुइसरनाथ धाम एसआइ इंद्रेश प्रजापति व सिपाही नरेश कुमार तथा दो अन्य व्यक्ति के साथ प्राइवेट कार से घर आए और उसके चचेरे देवर को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली दी। एतराज करने पर दारोगा व साथ आए सिपाही व अज्ञात व्यक्ति ने मिलकर भतीजे व उसकी नाबालिग लड़कियों को लात से मारा। नाबालिग पुत्री के प्राइवेट पार्ट को भी दबाया और कहा कि ज्यादा चिल्लाओगी तो थाने में ले जाकर सही कर दूंगा।
पीड़िता के साथ भी गलत हरकत करते हुए थाने ले गए। बाद में महिला को पुलिस वालों ने रात में छोड़ दिया और भतीजे का चालान कर दिया। इस प्रकरण की भी सांगीपुर थाने में सुनवाई नहीं हुई तो महिला ने कोर्ट की शरण ली। चौकी प्रभारी पर पहले भी उत्पीड़न का आरोप लगा था। दो साल का बच्चे के गायब होने के मामले में उसके ही पिता को चौकी में तलब करके पीटा था।