जिला पंचायत सदस्य ने भू-माफियाओं व उनके सिंडिकेट सहित राजस्व कर्मियों पर लगाए गंभीर आरोप, जमीन हड़पने के प्रयास का किया खुलासा
प्रतापगढ़। मंगरौरा तृतीय से जिला पंचायत सदस्य इंद्रदेव तिवारी ने प्रतापगढ़ में भू-माफियाओं और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों के कथित गठजोड़ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोमवार दोपहर जोगापुर में एक प्रेस वार्ता कर इस मामले का खुलासा किया। यही नहीं तहसील सदर में कागजातों में हेरफेर कर कब्जा करने का आरोप लगाया है जो गंभीर प्रकृति का है। उक्त मामले की शिकायत सीएम हेल्प लाइन पर भी की है। उक्त भूमि सगरा ग्राम सभा की है जो कोतवाली नगर के सगरा ITI के सामने का है। पीड़ित पक्षों ने सीएम सहित उच्चाधिकारियों से भी शिकायत की है।
जिला पंचायत सदस्य इंद्रदेव तिवारी ने बताया कि भूमाफियाओं का सिंडिकेट इतनी जल्दी में है कि वह कुछ ही दिनों में विवादित प्लाट की प्लाटिंग भी कर डाली और उसमें दो किता बैनामा भी कर दिया है। इन्द्रदेव तिवारी का यह भी कहना है कि जिस भूमि पर आईटीआई स्थित है, वह जमीन पर पहले ही चकबंदी के दौरान उसके स्वामी ने उसका मुआवजा ले लिया है। ऐसे में अब चन्द्रनाथ जी द्वारा उनकी बैनामें की जमीन को हड़पने का कार्य एक षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है। यह सामान्य मामला नहीं है, बल्कि जिले के सबसे तगड़े भूमाफियाओं के सिंडिकेट द्वारा बैनामें की जमीन को हड़पने का मामला है।
सदर तहसील के कटरा रोड़ स्थित आईटीआई के सामने सगरा ग्राम सभा की गाटा संख्या- 456 रकबा- 0.2950 हेक्टेयर पर भूमाफियाओं के सिंडिकेट ने बेसकीमती करोड़ों की जमीन पर प्लाटिंग कर कब्जा कर लिया है। ऐसा आरोप जिला पंचायत सदस्य इन्द्रदेव तिवारी ने बकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके लगाया है। सगरा ग्राम सभा की गाटा संख्या- 456 रकबा- 0.2950 हेक्टेयर में इन्द्रदेव तिवारी और उनके भाई सह खातेदार हैं। प्रेस कांफ्रेंस में अन्य सह खातेदार चन्द्र प्रकाश निवासी- रखहा, वीरेंद्र सिंह निवासी- भदोही एवं राम आसरे शर्मा “एडवोकेट” भी मौजूद रहे। सभी का आरोप है कि उनकी बेस कीमती भूमि को भूमाफियाओं के सिंडिकेट द्वारा जबरन कब्जा किया जा रहा है।
जिला पंचायत सदस्य इन्द्रदेव तिवारी ने बताया कि उनकी माता जी ने एक बैनामा साल- 2001 में जनपद प्रतापगढ़ की सदर तहसील के सगरा ग्राम की गाटा संख्या- 456 रकबा- 0.2950 हेक्टेयर भूमि में लिया था। उक्त भूमि उसकी माँ स्वर्गीय गिरजा देवी पत्नी स्वर्गीय राम बरन तिवारी के नाम से वरासत होकर उन्हें व उनके भाइयों को प्राप्त हुई है। इन्द्रदेव तिवारी का आरोप है कि उक्त भूमि पर चन्द्रनाथ शुक्ला द्वारा कागजातों में हेरफेर करके जनपद में सक्रिय भूमाफियाओं के सिंडिकेट के सहयोग से गुंडई और सरहंगई के बल पर जबरन कब्जा कर उस पर प्लाटिंग करके उसे बेंच लेना चाहते हैं।
भूमाफियाओं द्वारा एक षड्यंत्र के तहत चन्द्रनाथ जी के द्वारा दिनांक- 01/09/2016 को श्रीमान् जिलाधिकारी प्रतापगढ़ के न्यायालय में धारा- 30 का वाद प्रस्तुत किया गया, जिसमें कहा गया कि मेरी गाटा संख्या- 435 का नक्शा छोटा है, जिसे दुरुस्त किया जाये। वाद स्वीकार करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने सुनवाई हेतु वाद को मुख्य राजस्व अधिकारी के न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया। उक्त वाद में मुख्य राजस्व अधिकारी द्वारा दिनांक- 28/10/2016 को प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार 435 को 436 से रकबा दुरुस्त कर दिया गया।
अब यहीं से भूमाफियाओं के सिंडिकेट ने जालसाजी का खेल खेलना शुरू किया और रकबा दुरुस्त होने के बाद हस्तलिखित प्रार्थना पत्र में जानबूझकर छोड़े गए रिक्त स्थान में दिनांक- 01/09/2016 के प्रार्थना पत्र में हेरफेर करते हुए गाटा संख्या-456 जहाँ है, वहाँ पर वह काबिज है तथा भूचित्र गाटा संख्या- 435 स्थलानुसार दुरुस्त किया जाये। मुख्य राजस्व अधिकारी प्रतापगढ़ द्वारा दिनांक- 20/07/2018 को 435 की जगह 456 पारित कर दिया गया, जिसकी जानकारी उन्हें न हो सकी।
पूरे प्रकरण में इतनी खामियां हैं, फिर भी जनपद के राजस्व अधिकारियों द्वारा उसे संज्ञान में नहीं लिया जा रहा है। इन्द्रदेव तिवारी का कहना है कि उनकी दिवंगत माता के नाम दिनांक- 22/12/2017 को सम्मन भेजा जाता है, जिस पर ग्राम सगरा के नाम सहन दरवाजा पूरब नोटिस चस्पा किया गया और रिपोर्ट सेवा में प्रेषित कर दी गई। जबकि उनके पास एक मकान ग्राम- पूरे मुसई, पोस्ट- साल्हीपुर, प्रतापगढ़ में है और दूसरा मकान अरविंद नगर, पूरे पितई, तहसील- सदर कोतवाली नगर, प्रतापगढ़ में है। दोनों भवन के सहन दरवाजा उत्तर तरफ है।
इस प्रकरण में सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इंद्रदेव तिवारी कि माता जी की मृत्यु दिनांक- 03/09/2016 को हो चुकी थी, ऐसे में उनकी माता जी के नाम दिनांक- 22/12/2017 को गलत पते पर सम्मन भेजा जाना और दो गवाह के हस्ताक्षर कराकर रिपोर्ट सेवा में प्रेषित करना ही एक बड़ी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उक्त प्रकरण में जानकारी होने पर उनके द्वारा मुख्य राजस्व अधिकारी महोदय के समक्ष प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसे स्वीकार करते हुए श्रीमान् जी द्वारा स्थगन आदेश पारित किया गया।
इसबीच दिनांक- 20/10/2020 को गाटा संख्या- 456 को चन्द्रनाथ जी द्वारा एक इकरारनामा अपने भतीजे व भतीजे के सहयोगी के नाम कर दिया, जबकि मुकदमा न्यायलय में विचाराधीन था। इस कूट रचित दस्तावेज तैयार करने में भास्कर शुक्ला व प्रतीक सिन्हा सहित जनपद की भूमाफिया गैंग शामिल हैं। श्रीमान् मुख्य राजस्व अधिकारी ने दिनांक- 08/01/2024 को दोनों आदेश दिनांक- 28/10/2016 व दिनांक- 20/07/2018 निरस्त कर दिया गया। पत्रावली साक्ष्य हेतु दिनांक- 25/10/2024 को प्रस्तुत हो।
मजेदार बात यह है कि श्रीमान् मुख्य राजस्व अधिकारी द्वारा आदेश जारी कर देने के बाद दिनांक- 08/01/2025 को चन्द्रनाथ जी द्वारा श्रीमान् जिलाधिकारी महोदय के समक्ष इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया जाता है कि मुझे इस अदालत से न्याय की आशा नहीं है। उक्त वाद किसी अन्य अदालत में ट्रांसफर कर दिया जाये। उक्त प्रार्थना पत्र के आधार पर उक्त वाद श्रीमान् जिलाधिकारी महोदय के यहाँ ट्रांसफर होकर उसमें तारीख पेशी नियत की गई। जालसाजी के माहिर लोगों द्वारा इसी बीच दिनांक- 23/03/2024 को एक वाद 38 (2) का उप जिला मजिस्ट्रेट सदर महोदय के यहाँ चन्द्रनाथ के नाम से दाखिल किया गया।
उप जिला मजिस्ट्रेट सदर महोदय के द्वारा दिनांक- 21/09/2024 को आदेश कर दिया जाता है कि अन्य खातेदारों का नाम काटकर चन्द्रनाथ का नाम अंकित किया जाये, जबकि श्रीमान् जिलाधिकारी प्रतापगढ़ के न्यायालय में पहले से मुकदमा विचाराधीन रहा, जिसमें दिनांक-20/06/2025 को आदेश पारित किया गया कि धारा-30 के अंतर्गत उक्त वाद पोषणीय न होने के कारण निरस्त किया जाता है। इस पूरे प्रकरण में उप जिला मजिस्ट्रेट सदर महोदय के यहाँ अंतर्गत धारा- 38 (2) में तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और हल्का लेखपाल की जिस रिपोर्ट पर आदेश किया गया, वह रिपोर्ट ही संदेह के घेरे में है। सभी के हस्ताक्षर फेंक हैं।
ये रिपोर्ट भूमाफियाओं के सिंडिकेट द्वारा तैयार कराई गई है। उप जिला मजिस्ट्रेट सदर महोदय के द्वारा जारी आदेश में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चन्द्रनाथ जी द्वारा दायर मुकदमा से सम्बन्धित पत्रवाली पर कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या- टी-202402570304236 है और उप जिला मजिस्ट्रेट सदर महोदय के आदेश में मुकदमा कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या- टी-202402570304326 है। राजस्व विभाग की साईट पर जो आदेश अपलोड किया गया है, उसमें कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या- टी-202402570304326 जो चन्द्रनाथ बनाम सरकार वाद संख्या- 4326/2024 है।
जबकि उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में संचित उपरोक्त पत्रावली के आदेश पत्रक पर कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या- टी-202402570304236 है। तहसीलदार न्यायिक के यहाँ धारा- 34 के अंतर्गत कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या- टी-202402570304226 दर्ज है और उक्त वाद में पक्षकार कृष्णपाल धर दूबे बनाम इंसाफ बहादुर हैं। उपरोक्त चन्द्रनाथ द्वारा जिन चकबंदी अधिकारियों के आदेश के आधार पर स्वयं का नाम दर्ज करने हेतु प्रार्थना पत्र उप जिला मजिस्ट्रेट सदर के यहाँ प्रस्तुत किया गया है, न तो उन आदेशों की नकल ही मूल पत्रावली पर संलग्न है और न ही ऐसा कोई वाद चकबंदी अदालतों से निस्तारित ही हुआ है।
पीड़ित पक्ष द्वारा जब इस सम्बन्ध में राजस्व अभिलेखागार में निरीक्षण किया गया तो यह ज्ञात हुआ कि उपरोक्त चकबंदी अदालतों से पारित तथाकथित चकबंदी आदेशों के संबंध में कभी कोई वाद न ही दाखिल हुआ और न ही निस्तारित हुआ। उपरोक्त तथाकथित आदेशों का अस्तित्व में न होने से यह स्पष्ट है कि उक्त चन्द्रनाथ आदि द्वारा राजस्व अभिलेखागार में संरक्षित शासकीय दस्तावेज जो जिलाधिकारी के संरक्षण में होता है, फिर भी आकार पत्र 23 व खतौनियों में कूट रचना करते हुए भूलेख नियमावली में यथाउल्लिखित प्राविधानों के प्रतिकूल स्वयं से अमलदरामद की गई।