जनपद प्रतापगढ़ सदर तहसील के सामने बाबागंज में पवन प्रेस में सदर तहसील के नायब तहसीलदार सिटी कोर्ट की सैकड़ों पत्रवालियां मिलने की सूचना से मचा हड़कंप।

राजस्व विभाग की नाक कटवा रहा जनपद प्रतापगढ़ की सदर तहसील…
प्रतापगढ़। यहाँ यह जान लेना आवश्यक है कि सदर तहसील में कुल कितनी राजस्व कोर्ट संचालित है ? सदर तहसील में एक कोर्ट एसडीएम सदर की है और दूसरी कोर्ट एसडीएम न्यायिक की है। इसी तरह एक कोर्ट तहसीलदार सदर की है तो दूसरी कोर्ट तहसीलदार न्यायिक की है। बाकी कोर्ट नायब तहसीलदार की है। सबसे अधिक मुकदमें एसडीएम और तहसीलदार कोर्ट में होते हैं।
सदर तहसील में मुकदमें की पत्रवालियां किसी प्रेस में मिलने की सूचना पर अधिवक्ताओं सहित वादकारी भी पवन प्रेस पहुंचने लगे। वादकारियों को अपनी पत्रवालियों के गायब होने का डर सताने लगा। अधिवक्ता भी हुए चिंतित कि सादर तहसील की पत्रवालियां आखिर किसी प्रेस में कैसे पहुँची ? उसे प्रेस में किसके द्वारा लाया गया ? ये पत्रावलियां प्रेस में किस उदेश्य से रखी गई थी ? ऐसे अनेको सवाल लोगों के मन में कौंधने लगा।
इस संबंध में सडीएम सदर नैंसी सिंह से जब खुलासा इंडिया की टीम ने सम्पर्क किया तो उन्होंने माना कि सदर तहसील के नायब तहसीलदार सिटी कोर्ट की कुछ पत्रवालियां पवन प्रेस में मिलने की सूचना उन्हें भी है। सभी पत्रावलियों पर तत्कालीन नायब तहसीलदार सिटी आनंद कुमार यादव के हस्ताक्षर हैं। सभी पत्रावलियां पुरानी हैं और दाखिला के लिए रखी गई थी। ऐसे में उन्होंने ये पत्रावलियां पवन प्रेस में कौन ले गया और किसकी इजाजत से ले गया ? यह जाँच का विषय है।
उन्होंने यह भी बताया कि तहसीलदार सदर कोर्ट में पेशकर से कुछ अधिवक्ताओं ने मारपीट की है। सदर तहसील में अधिवक्ताओं के भेष में कुछ अराजक तत्व घुस आये हैं जो अपने गलत कार्य को भी कराने का बेजा दबाव बनाते हैं और न करने पर मारपीट तक करते हैं। पवन प्रेस में मिली पत्रवालियां कहीं उन सबकी चाल तो नहीं है। सभी बिंदुओं की जाँच हो रही है। जाँच होने तक कुछ कह पाना मुश्किल है। फिलहाल एसडीएम सदर ने मामला गंभीर माना और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की बात कही है।
राजस्व विभाग उत्तर प्रदेश का नाम जेहन में आते ही भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की ज्वालामुखी फटने लगती है। आज प्रतापगढ़ के सदर तहसील में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की ज्वालामुखी फटी है। सदर तहसील में विगत कई वर्षों से एसडीएम कोर्ट और तहसीलदार सदर कोर्ट सहित अन्य राजस्व विभाग की कोर्ट में विचाराधीन मुकदमों की पत्रावलियां गायब हुई थी जो आज तक नहीं मिल सकी हैं। ये सम्पूर्ण मामला गंभीर प्रकृति का है, जिसे नजरदांज नहीं किया जा सकता।
राजस्व अदालतों में मुकदमें की पत्रवालियां गायब होने की शिकायत वादकारी और उनके अधिवक्ताओं द्वारा अक्सर किया जाता रहा है। तत्कालीन एसडीएम सदर उदय भान सिंह ने स्वीकार किया था कि उनके यहाँ तो 900 पत्रावलियां गायब हैं, जबकि सीआरओ प्रतापगढ़ की कोर्ट से 1700 पत्रवालियां गायब हैं। तत्कालीन एसडीएम सदर उदय भान सिंह के इस बयान से राजस्व विभाग की बड़ी किरकिरी हुई थी, जिसके बाद एसडीएम सदर के राजस्व पेशकार सुरेन्द्र पाण्डेय को सस्पेंड करना पड़ा था, परन्तु गायब पत्रावलियां आजतक नहीं मिली।