मेरठ के बाद अब इस रूट पर चलेगी नमो भारत,यूपी में नए कॉरिडोर के लिए जिले फाइनल,12 स्टेशनों की लिस्ट तैयार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में यात्रा को और तेज बनाने की बड़ी योजना तैयार हो रही है।मेरठ के बाद कानपुर से अयोध्या तक नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार कानपुर से अयोध्या को जोड़ने वाला नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर बनाने जा रही है। इसकी मदद से लोग कानपुर से अयोध्या सिर्फ डेढ़ घंटे में पहुंच सकेंगे।कॉरिडोर स्टेट कैपिटल रीजन मास्टर प्लान का हिस्सा है। रूट कानपुर के नयागंज से शुरू होकर उन्नाव,लखनऊ,बाराबंकी होते हुए अयोध्या तक जाएगा।इसकी कुल लंबाई लगभग 187 किलोमीटर बताई जा रही है। ट्रेन की टॉप स्पीड 160-170 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।
दो चरणों में बनेगा प्रोजेक्ट
पहला चरण कानपुर (नयागंज) से लखनऊ एयरपोर्ट (अमौसी) तक – 67 किलोमीटर और दूसरा चरण लखनऊ से आगे बाराबंकी होते हुए अयोध्या तक।
क्या होगा फायदा
नया प्रोजेक्ट कॉरिडोर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।स्टेशनों के आसपास आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी,रियल एस्टेट का विकास होगा और नौकरियों के नए मौके बनेंगे।
कॉरिडोर के 12 प्रस्तावित स्टेशन
इस पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।अहम बात यह है कि इन स्टेशनों के आसपास के इलाकों को विशेष इकोनॉमिक और कमर्शियल हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
नयागंज (कानपुर)
उन्नाव
बशीरतपुर
नवाबगंज
बंथरा
अमौसी (लखनऊ)
सुशांत गोल्फ सिटी
जुग्गौर
बरेल
सफदरगंज
भिटरिया
अयोध्या
दिल्ली के सराय काले खां जैसा बनेगा लखनऊ स्टेशन
जिस तरह दिल्ली-मेरठ नमो भारत रूट पर दिल्ली का सराय काले खां मुख्य इंटरचेंज स्टेशन है।ठीक उसी तर्ज पर इस नेटवर्क में लखनऊ को सबसे बड़ा रीजनल इंटरचेंज हब बनाया जाएगा।इस हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा फायदा कानपुर,उन्नाव,बाराबंकी और अयोध्या के बीच रोज सफर करने वाले नौकरीपेशा युवाओं,छात्रों,व्यापारियों और पर्यटकों को मिलेगा,इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि इन क्षेत्रों में विकास की रफ्तार भी कई गुना बढ़ जाएगी।
लखनऊ और उसके आसपास के इलाकों को दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के इलाकों को दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है।प्रदेश सरकार ने स्टेट कैपिटल रीजन के विकास का एक बड़ा और व्यापक रोडमैप तैयार किया है, जिसका मकसद लखनऊ के साथ-साथ इसके पड़ोसी जिलों का भी समान रूप से विकास करना है।
6 जिलों को मिलाकर बनेगा एससीआर
इस नए स्टेट कैपिटल रीजन में लखनऊ सहित कुल 6 जिलों को शामिल किया गया है इसका कुल क्षेत्रफल 26,700 वर्ग किलोमीटर होगा,जो लगभग 3 करोड़ से ज्यादा की आबादी को बेहतर और सुनियोजित शहरी सुविधाएं देगा।
लखनऊ
बाराबंकी
सीतापुर
हरदोई
उन्नाव
रायबरेली
क्यों पड़ी एससीआर की जरूरत
वर्तमान में लखनऊ में आर्थिक गतिविधियां और सुविधाएं बहुत ज्यादा हैं,जबकि पड़ोसी जिले विकास के मामले में काफी पीछे हैं। उद्योग: लखनऊ में प्रति 1 लाख आबादी पर लगभग 700 छोटे उद्योग हैं,जबकि सीतापुर में यह संख्या सिर्फ 130 है। बैंकिंग सुविधाएं:प्रति लाख आबादी पर लखनऊ में 17 बैंक शाखाएं हैं,जबकि सीतापुर में 3, हरदोई में 4, उन्नाव में 4.5, रायबरेली में 5 और बाराबंकी में सिर्फ 4 बैंक हैं।
जमीन की मांग: बड़े निवेशक ज्यादातर लखनऊ,नोएडा या कानपुर जैसे बड़े शहरों में ही जमीन मांगते हैं। एससीआर बनने से लखनऊ के आसपास एक बड़ा और विकसित लैंड बैंक तैयार होगा,जिससे व्यापार करना आसान हो जाएगा।जब इन पड़ोसी जिलों में भी बड़े शहरों जैसी सुविधाएं पहुंचेंगी, तो लोगों को नौकरी,पढ़ाई,इलाज या बिजनेस के लिए लखनऊ नहीं भागना पड़ेगा।इससे राजधानी लखनऊ पर आबादी का दबाव कम होगा और अर्ध-शहरी व ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों का जीवनस्तर सुधरेगा, बुनियादी ढांचा मजबूत होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।