बेशकीमती सरकारी नजूल सरकार भूमि को हथियाने के लिए अवैध कब्जाधारक झूठ और फरेब की पार कर दी सारी सीमाएं, हाईकोर्ट को भी कर रहा है, गुमराह

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय खंडपीठ में नजूल सरकार की भूमि हथियाने को लेकर विगत दो माह में अवैध कब्जाधारक सुल्तान हसन द्वारा तीसरी याचिका दाखिल कर अब कोर्ट को भी गुमराह करने की कोशिश हो रही है। रिट- C नंबर- 9608 / 2026 कोर्ट नंबर- 8, जस्टिस माननीय जसप्रीत सिंह के समक्ष याचिकाकर्ता सुल्तान हसन की वकील सुश्री कामिनी सिंह द्वारा तत्काल सुनवाई के लिए आग्रह किया गया। जबकि प्रतापगढ़ सदर तहसील के बेल्हाघाट की गाटा संख्या- 1016 जो सरकारी अभिलेखों में नजूल सरकार की भूमि के रूप में दर्ज है। फिर भी अवैध कब्जाधारक बेशकीमती सरकारी भूमि को झूठ, फरेब और जालसाजी करके हड़पना चाहता है।

याचिकाकर्ता सुल्तान हसन की वकील सुश्री कामिनी सिंह की बात सुनी गई। उन्होंने बताया कि याचिका इस कोर्ट की रजिस्ट्री में तत्काल सुनवाई के लिए दायर की जानी है, क्योंकि इसमें याचिकाकर्ता के रिहायशी मकान को गिराने का मामला शामिल है। मामले की गंभीरता और जल्दबाजी को देखते हुए, हाईकोर्ट ने दिनांक-3 सितंबर, 2026 को ही इस याचिका पर सुनवाई करने की अनुमति दी थी। इसी वजह से यह मामला कोर्ट के सामने लाया गया है। जबकि सच्चाई यह है को दिनांक- 17/08/2026 को अध्यक्ष/नियंत्रक प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ ने अनधिकृत निर्माण को अआदेश दिनांक से 15 दिवस के अंदर स्वतः ध्वस्त करने का आदेश निर्गत किया था
उक्त याचिका में याचिकाकर्ता सुल्तान हसन ने चार लोगों को पक्षकार बनाया है। याचिका में नम्बर-1- प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, नम्बर-2 जिलाधिकारी प्रतापगढ़/नियंत्रक प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ व नम्बर-3 उप जिलाधिकारी सदर/नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ एवं नम्बर-4 शिकायतकर्ता रमेश चन्द्र तिवारी पक्षकार के रूप में हैं। याचिकाकर्ता सुल्तान हसन ने कोर्ट को गुमराह करके बताया है कि ध्वस्तीकरण के आदेश से उसका रिहायशी मकान गिरा दिया जायेगा। इसलिए उक्त याचिका की सुनवाई त्वरित की जाये। याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में झूठ बोला है। याचिकाकर्ता सुल्तान हसन का रिहायशी मकान अलग है और ध्वस्तीकरण वाला एरिया अलग है।

अध्यक्ष/नियंत्रक प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिनांक-17/08/2026 को निर्गत किया है और 15 दिन के अंदर अनधिकृत निर्माण करने वाले सुल्तान हसन को स्वतः ध्वस्त करने के लिए निर्देश दिया गया है। अनधिकृत निर्माण करने वाले सुल्तान हसन आदेश को उत्तर प्रदेश शासन/प्रतिनिधि मंडलायुक्त, प्रयागराज मंडल, प्रयागराज के समक्ष उक्त आदेश के खिलाफ निगरानी का वाद दाखिल करके हाईकोर्ट को गुमराह करके याचिका दाखिल की है और सरकारी जनूल भूमि पर अनधिकृत नया ब्यवसायिक टीनसेड गोदाम के निर्माण को अपना रिहायशी मकान बताया है। इस तरह याचिकाकर्ता अब हाईकोर्ट को भी झूठ बोलकर गुमराह कर रहा है।
याचिका की एक कॉपी मुख्य स्थायी वकील (Chief Standing Counsel) के कार्यालय को मिल गई है। उनका कहना है कि चूंकि कॉपी सुनवाई के दौरान उसी दिन मिली थी, इसलिए उन्हें मामले की जांच करने और इस संबंध में अपने निर्देश अपडेट करने के लिए थोड़ा समय चाहिए। राज्य प्रतिवादियों (State respondents) की ओर से अतिरिक्त मुख्य स्थायी वकील संजय सरीन ने निष्पक्ष रूप से कहा है कि उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विवादित आदेश के तहत कोई तोड़-फोड़ न करें। उक्त याचिका की सुनवाई दिनांक-07/09/2026 को फ्रेस केस के रूप में की जायेगी। अभी पक्षकार नम्बर-2 व 3 की तरफ से स्थिति स्पष्ट नहीं है कि याचिका में पक्ष रखने कौन जायेगा ?

उत्तर प्रदेश राज्य, प्रमुख सचिव (राजस्व), लखनऊ और 3 अन्य के माध्यम से प्रतिवादीगण ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए, इस मामले को 7 सितंबर, 2025 को नए मामलों की सूची में शामिल किया जाए। अतिरिक्त मुख्य स्थायी वकील अपने निर्देश अपडेट कर सकते हैं। दिए गए बयान को देखते हुए, उम्मीद है कि अधिकारी निर्देशों का पालन करेंगे और मामले की कार्यवाही में जल्दबाजी नहीं करेंगे, खासकर तब जब मामला अब कोर्ट के विचाराधीन है। याचिकाकर्ता सुल्तान हसन उप जिलाधिकारी सदर/नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ हाजिर थे, परन्तु वहाँ अपनी बात न रखकर कारण बातों नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती देने पहुँच गए थे।
हाईकोर्ट इलाहबाद खंडपीठ लखनऊ ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता को कहा था कि उक्त प्रकरण की सुनवाई उप जिलाधिकारी सदर/नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ के समक्ष कराने के लिए वहाँ उपस्थित हो। सुल्तान हसन उप जिलाधिकारी सदर/नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ के यहाँ अपना पक्ष रखा, परन्तु जमीन के मालिकाना हक से सम्बन्धित कोई अभिलेख प्रस्तुत न कर पाने के दशा में दिनांक- 23/06/2026 को उप जिलाधिकारी सदर/नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया। उक्त आदेश को सुल्तान हसन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने स्थगनादेश जारी करते हुए याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपील दाखिल करने के लिए आदेश दिया था। सुल्तान हसन द्वारा अध्यक्ष/नियंत्रक प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ के समक्ष अपील दाखिल किया। अपील की सुनवाई के दौरान भी सुल्तान हसन ने अपने अनधिकृत निर्माण के सम्बन्ध में भूमि के स्वामित्व से सम्बन्धित कोई वैध अभिलेख प्रस्तुत न कर सके। लिहाजा सुल्तान हसन की अपील खारिज करते हुए उप जिलाधिकारी सदर/नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ का आदेश दिनांक- 23/06/2026 यथावत बहाल रखा और अपने आदेश में 15 दिनों के अंदर स्वतः अनधिकृत निर्माण गिराने का आदेश दिया।
इस बार भी सुल्तान हसन हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और झूठ व फरेब की सारी सीमा लांघते हुए अनधिकृत नये ब्यवसायिक टीनसेड गोदाम के निर्माण को अपना रिहायशी मकान बता दिया और उसे ध्वस्त करना बताकर त्वरित सुनवाई किये जाने का आग्रह किया गया, जिस पर हाईकोर्ट इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ ने तत्काल सुनवाई करके अध्यक्ष/नियंत्रक प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिनांक-17/08/2026 को स्टे कर दिया। अगली सुनवाई दिनांक-07/09/2026 को फ्रेस केस के रूप में की जायेगी। देखना होगा कि हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता सुल्तान हसन की झूठ फरेब कितनी देर टिकती है ?