भाजपा नेता पर कानपुर देहात के थाना अकबरपुर में दर्ज हुआ छः करोड़ रूपये शासकीय धनराशि के गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात व जालसाजी का मुकदमा

धोखाधड़ी एवं जालसाजी के आरोपी सुनील कुमार गोयल, जितेन्द्र कुमार अग्रवाल तथा अन्य संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा दर्ज होते ही कानपुर देहात से लेकर प्रतापगढ़ तक सरगर्मियां हुई तेज…
प्रतापगढ़/कानपुर देहात। जनपद प्रतापगढ़ में भाजपा ब्यापार प्रकोष्ठ के जिला संयोजक सुनील कुमार गोयल और उनके सहयोगी जीतेंद्र अग्रवाल पर भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड द्वारा संचालित विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के अंतर्गत स्वीकृत शासकीय धनराशि के गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी एवं अन्य संज्ञेय अपराधों के संबंध में कानपुर देहात के थाना अकबरपुर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुई। सुनील कुमार गोयल कोतवाली नगर प्रतापगढ़ के भदरी हाउस के निवासी हैं। यह मुकदमा उन्हीं के बड़े भाई विजय कुमार गोयल बतौर प्रबंध निदेशक, भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड ने दर्ज कराई है।
आरोपी सुनील कुमार गोयल के बड़े भाई विजय कुमार गोयल बतौर प्रबंध निदेशक, भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड ने दर्ज कराई है, प्राथमिकी
विजय कुमार पुत्र स्व0 केदारनाथ, निवासी 202/9, ए.पी. सेन रोड, नील रंग, लालबाग, लखनऊ-226001, प्रबंध निदेशक, भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड, स्थित 9, प्रथम तल, नटराज कम्प्लेक्स, 11 बी.एन. रोड, लालबाग, लखनऊ, सविनय निवेदन करता है कि भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड एक बहुराज्यीय सहकारी समिति है, जो बहुराज्यीय सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत है। सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की आधिकारिक रिपोर्ट दिनांक- 11.04.2025 में भी संस्था की अधिकृत संगठनात्मक संरचना का उल्लेख किया गया है।
संस्था बनाकर सरकारी धन को हजम करने का ये खेल काफी पुराना है, जो आज भी बदस्तूर जारी है
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संस्था की विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के अंतर्गत जनपद कानपुर देहाल (माती) में विभिन्न निर्माण कार्यों हेतु शासकीय धनराशि स्वीकृत की गई थी, जिसे बैंक ऑफ बड़ौदा, शाखा माती, जनपद कानपुर देहात स्थित खाता संख्या- 30700100009127 में जमा कराया गया। उक्त निर्माण कार्यों के निष्पादन एवं निधियों के उपयोग का उत्तरदायित्व संस्था के तत्कालीन महाप्रबंधक (प्रशासन) सुनील कुमार गोयल तथा तत्कालीन अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार अग्रवाल को सौंपा गया था। संस्था बनाकर सरकारी धन को हजम करने का ये खेल काफी पुराना है, जो आज भी बदस्तूर जारी है।
महज तीन सालों में छः करोड़, बत्तीस लाख, पच्चीस हजार रूपये का हुआ है, गबन
वर्ष- 2015 से वर्ष- 2018 के मध्य दोनों ने आपराधिक षडयंत्र के तहत मिलीभगत कर उक्त खाते से लगभग 6,32,25,000/- (छः करोड़, बत्तीस लाख, पच्चीस हजार रूपये) की अवैध निकासी की तथा धनराशि को अपने निजी हित में एवं विभिन्न निजी संस्थाओं/फर्मों के माध्यम से स्थानांतरित कर गबन किया। इसके अतिरिक्त उक्त बैंक खाते से लगभग 94,03,700/- (चौरानवे लाख, तीन हजार, सात सौ रूपये) की धनराशि भी अनियमित एवं संदेहास्पद रूप से निकाली गई, जिसके संबंध में न तो संस्था की कोई स्वीकृति प्राप्त की गई, न ही किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा कोई अनुमोदन दिया गया और न ही किसी प्रकार की निविदा प्रक्रिया अथवा वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया।
आरोपियों ने संस्था के बैंक खाते को भी बिना किसी विधिक अधिकार के अन्यत्र स्थानांतरित कर लिया, जिससे वित्तीय नियंत्रण एवं अभिलेखीय परीक्षण हुआ, प्रभावित
समस्त निकासी पूर्णतः धोखाधड़ी, कूटरचना एवं आपराधिक विश्वासघात का परिणाम है तथा इन धन राशियों के वास्तविक उपयोग का कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है। शासन द्वारा समय-समय पर विभिन्न पत्रों के माध्यम से निर्माण कार्यों एवं धनराशि के उपयोग के संबंध में जानकारी एवं स्पष्टीकरण मांगा जाता रहा, किन्तु आरोपियों द्वारा तथ्य छिपाए गए तथा शासन को भ्रामक एवं असत्य जानकारी प्रदान की गई। अपनी अनियमितताओं को छिपाने के उद्देश्य से आरोपियों ने संस्था के बैंक खाते को भी बिना किसी विधिक अधिकार के अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया, जिससे वित्तीय नियंत्रण एवं अभिलेखीय परीक्षण प्रभावित हुआ।
उक्त तथ्यों के समर्थन में बैंक अभिलेख, शासकीय पत्राचार, सहकारिता मंत्रालय की रिपोर्ट, सेवा से पृथक्करण आदेश तथा अन्य संबंधित दस्तावेज है, उपलब्ध
संस्था द्वारा अनेक अवसरों पर स्पष्टीकरण मांगने, नोटिस जारी करने एवं धनराशि का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने का अवसर दिए जाने के बावजूद आरोपियों ने न तो गबन की गई राशि लौटाई और न ही कोई वास्तविक बिल, वाउचर अथवा उपयोगिता प्रमाण प्रस्तुत किया। फलस्वरूप संस्था द्वारा सुनील कुमार गोयल को सेवा से पृथक भी कर दिया गया। उपर्युक्त समस्त कृत्यों से स्पष्ट है कि आरोपियों ने शासकीय धनराशि का गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, कूटरचित अभिलेखों का उपयोग तथा अन्य गंभीर संज्ञेय अपराध कारित किए हैं, जिससे न केवल संस्था बल्कि राज्यकोष को भी भारी आर्थिक क्षति हुई है तथा आरोपियों ने स्वयं अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया है।