प्रतापगढ़ के महुली वार्ड में जर्जर मकान बना काल, मलबे में दबकर एक ही परिवार के 6 लोगों की दर्दनाक मौत

उजड़ गया पूरा परिवार: बारिश में ढहा 100 साल पुराना मकान, चार ब्यस्क समेत दो मासूम बच्चों की मौत
हादसे में मृतक हुए लोगों ने सोचा भी न रहा होगा कि कल का सूरज नहीं देख सकेंगे

महुली वार्ड में मातम, प्रमोद-रीता सहित छह की गई जान, बेटा अमन अस्पताल में भर्ती
सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचा। घंटों चले अभियान के बाद सभी को मलबे से निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। परिवार का अमन श्रीवास्तव इस हादसे में सुरक्षित बच गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से कई घंटों तक चले राहत एवं बचाव अभियान में मलबा हटाकर सभी को बाहर निकाला गया, लेकिन छह लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। घायल अमन को तत्काल अस्पताल भेजा गया।
हादसे के बाद प्रशासन ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता देने का कोरा आश्वासन भी दे दिया है
घटना के बाद पूरे महुली वार्ड में शोक की लहर दौड़ गई। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर राहत कार्यों का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में लगातार बारिश के कारण जर्जर मकान के ढहने की बात सामने आ रही है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। अब प्रशासन से कौन पूंछे कि अब वह हर संभव सहायता देने का आश्वासन किसे दे रहा है ? परिवार में सिर्फ एक ब्यक्ति बचा है और वह भी गंभीर स्थिति में है, जिसका इलाज चल रहा है।
एसी के कारण एक कमरे में सो रहा था, पूरा परिवार
नगरपालिका द्वारा जर्जर भवनों की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, हादसे में प्रमोद श्रीवास्तव, उनकी पत्नी रीता श्रीवास्तव, बेटे नितिन, माधुरी तथा दो मासूम बच्चों की जान चली गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि लगभग 100 वर्ष पुराने जर्जर मकान में परिवार का रहना कैसे जारी रहा। क्या नगरपालिका की ओर से भवन को खाली कराने या ध्वस्त करने की कोई नोटिस जारी की गई थी ? यदि नोटिस दी गई थी तो उसका पालन क्यों नहीं कराया गया, और यदि नहीं दी गई थी तो इतने खतरनाक भवन की स्थिति पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ी ? इन सभी बिंदुओं पर जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।