नगरपालिका अध्यक्ष रहे हरि प्रताप सिंह की राजनीतिक तेरहवीं के बाद इकलौते बेटे और भाई ने एमएलसी साले के सहारे सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ से की मुलाकात

प्रतापगढ़। आधुनिकता की चकाचौंध में इंसान इस कदर पगलाया हुआ है कि उसे यह भी नहीं पता कि जिस शासन सत्ता और धन दौलत के लिए वह परेशान हैं, वह क्षणभंगुर है। फिर भी उसे हासिल करने के लिए झूठ, फरेब, चापलूसी, बेईमानी और अनैतिकता के रास्ते को अपनाता है। एक बार वह उसे हासिल भी कर ले तो भी वह स्थाई नहीं रहता। सबकुछ जानते हुए भी इंसान उसे ही पसंद करता है जो जीवन में कष्टकारी होता है। जीवन में कष्ट भले ही मिलता रहे, परन्तु सत्ता सुख और नबाबी में कोई कमी न आने पाए। इसी चक्रब्यूह में इंसान जीवन भर हैरान व परेशान होकर एक दिन अंतिम गति को पहुँच जाता है और सब यहीं छोड़ जाता है।

कलयुग में नाते रिश्ते अब रह गया महज दिखावा  

ये बातें आज इसलिए प्रासंगिक हो गई है, क्योंकि प्रतापगढ़ जनपद की नगरपालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ के अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह की लम्बी बीमारी के बाद राजधानी दिल्ली के एक निजी हॉस्पिटल में 22 मई, 2024 को मध्यरात्रि मौत हो गई थी। उक्त घटना की सूचना स्वयं उनके इकलौते बेटे द्वारा अपनी फेसबुक वाल पर पोस्ट करके आमजन तक पहुँचाने का कार्य किया था। अभी हरि प्रताप सिंह की पार्थिव शरीर अस्पताल में थी और राजधानी दिल्ली से लेकर प्रतापगढ़ तक उप चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई थी। स्वयं हरि प्रताप सिंह के परिजन भी विचार करने लगे थे कि अंतिम दर्शन के बाद अंतिम यात्रा और अतेष्टि की कैसी रूपरेखा तैयार की जाए, ताकि उसे चुनाव में कैश किया जा सके।

नपाध्यक्ष रहे हरि प्रताप सिंह को अपनी मौत का अंदेशा हो गया था, तभी मौत से पहले इकलौते बेटे को सीएम के सामने किये थे, पेश…

भाजपा नेता हरि प्रताप सिंह इकलौते बेटे को बनाना चाहते थे, साल-2023 के चुनाव भाजपा से उम्मीदवार, भाई के बगावत से पीछे खींचे थे, पांव 

नगरपालिका अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह कई महीने से अस्वस्थ चल रहे थे और लोगों के पूंछने पर नाराजगी भरे लहजे में कहते थे कि वह तो पूर्णतः स्वस्थ हैं, जबकि निकाय चुनाव-2023 के पहले वह काफी अस्वस्थ थे और चुनाव में उन्होंने अपनी नवीन फोटो का कहीं भी इस्तेमाल नहीं किया था। सिर्फ वीडियो फुटेज की ताजी तस्वीरें देखने को मिलती थी, जिसे देखने से लग जाता था कि वह किसी असाध्य रोग से ग्रसित हैं। भाजपा नेता अपनी पत्नी प्रेमलता सिंह को नपाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने में सफल हो गए थे। साल- 2023 के निकाय चुनाव में वह अपने इकलौते बेटे विशाल विक्रम सिंह को भाजपा से टिकट दिलाना चाहते थे, परन्तु छोटे भाई विनय प्रताप सिंह उर्फ बब्बू की बगावत से पीछे हट गए थे।

नपाध्यक्ष के पद पर पांच बार हरि प्रताप सिंह और एक बार उनकी पत्नी प्रेमलता सिंह निर्वाचित हुई, परन्तु बेटे का नहीं भरा है, मन 

नगरपलिका परिषद् बेला-प्रतापगढ़ के चुनाव में हरि प्रताप सिंह पांचवी बार निर्वाचित हुए थे। साल- 2023 के चुनाव में हरि प्रताप सिंह की इच्छा थी कि वह अपनी पत्नी प्रेमलता सिंह को पुनः चुनावी अखाड़े में उतारे, क्योंकि साल- 2017 में नगरपालिका का अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित था, इसलिए हरि प्रताप सिंह अपनी पत्नी को भारतीय जनता पार्टी से टिकट दिलाकर चुनाव लड़ाए थे। चूँकि साल- 2017 में भाजपा ने प्रतापगढ़ विधानसभा से जब हरि प्रताप सिंह को टिकट नहीं दिया तो वह नाराज होकर कांग्रेस में शामिल हो गए और वहाँ से टिकट जब न मिला तो प्रतापगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा और अपना दल एस के उम्मीदवार रहे संगम लाल गुप्ता के खिलाफ निर्दलीय नामांकन कर डाला था।

हरफन मौला थे, भाजपा नेता हरि प्रताप सिंह, सारे दलों के नेताओं को चुनाव में करते थे, मैनेज  

यह खेल जानबूझकर नगरपालिका अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह द्वारा खेला गया और बाद में संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पीएम मोदी जी कार्य देखने वाले आचार्य लक्ष्मण प्रतापगढ़ आकर हरि प्रताप सिंह का नामांकन वापस कराया था और उनके द्वारा रखी गई शर्तों को स्वीकार किया गया था, जिसमें एक एक शर्त विधानसभा चुनाव बाद निकाय चुनाव में नगरपालिका के चुनाव में अध्यक्ष पद का टिकट उन्हें पुनः दिए जाने की शर्त भी शामिल रही। जबकि भाजपा नेता हरि प्रताप सिंह द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर टिकट बेंच देने तक का आरोप लगाया था और टिकट की लालच में पार्टी को बदनाम कर कांग्रेस में चले गए थे।

तीन बार प्रतापगढ़ विधानसभा और छः बार नगरपालिका अध्यक्ष पद का मिल चुका भाजपा से टिकट, फिर भी नहीं भरा, मन 

हालांकि उन्हें साल- 2017 में टिकट पाने में बहुत कठिनाई हुई थी और इस कार्य के लिए वह अपने साले कृष्ण प्रताप सिंह और एक बड़े पत्रकार का सहयोग लिया था। भाजपा शीर्ष नेतृत्व को बताया और समझाया गया कि प्रेमलता सिंह जौनपुर सांसद केपी सिंह की सगी बहन हैं और कल्याण सिंह के कार्यकाल में कारागार मंत्री रहे स्व. उमानाथ सिंह की बेटी हैं। तब जाकर प्रेमलता सिंह को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया। वैसे कहने के लिए भाजपा में वंशवाद और परिवारवाद की परिपाटी नहीं है, परन्तु अपवाद स्वरूप कहीं न कहीं ये परिपाटी दिख जाती है। हरि प्रताप सिंह और उनके ससुराल में ये परिपाटी कायम है।

नपाध्यक्ष रहे हरि प्रताप सिंह का अंतिम यात्रा से लेकर श्मशान घाट और तेरहवीं तक उपचुनाव हेतु सहानुभूति बटोरने का किया जा रहा उपाय

शायद इसीलिए नगरपालिका अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह के इकलौते बेटे विशाल विक्रम सिंह ने राजधानी दिल्ली से लेकर प्रतापगढ़ तक अपने पिता के शव को दूसरे दिन देर रात्रि में लाये और सुबह 8 बजे नगरपालिका परिषद् कार्यालय में शोकसभा का आयोजन रखा गया था, परन्तु राजनीतिक लाभ के चक्कर में अपने पिता के जनाजे को घर से उठाने में 10 बजा दिए और नतीजा यह हुआ कि कुछ दूर चलने के बाद लोग अंतिम यात्रा से धीरे-धीरे खिसकते गए और नगरपालिका कार्यालय पहुँचने तक नाममात्र के दरबारी लोग ही शेष बचे थे। प्रयागराज में अंतिम संस्कार किया गया और तेरहवीं का कार्ड नगरपालिका के चुनाव की मद्देनजर घर-घर बांटा गया था।

सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के अधिकृत एकाउंट से हरि प्रताप सिंह के बेटे विशाल विक्रम सिंह को बताया जा रहा है, पूर्व विधायक 

एक पुत्र के लिए अपने पिता का वियोग से बढ़कर दुनिया में दूसरा कोई वियोग नहीं हो सकता, परन्तु इस घोर कलयुग में सारे नाते रिश्ते गौढ़ हो चुके हैं। तभी तो पिता की मौत को अभी एक माह भी पूरे नहीं हुए और हरि प्रताप सिंह के इकलौते बेटे विशाल विक्रम सिंह और भाई विनय प्रताप सिंह उर्फ बब्बू अपने एमएलसी साले ब्रजेश कुमार सिंह उर्फ प्रिन्सू के सहारे सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मुलाकात भी कर लिए, जिसके फोटो विशाल विक्रम सिंह ने फेसबुक पर शेयर किया है। सबसे हास्यास्पद बात यह है कि सूबे के मुखिया के अधिकृत एकाउंट से भी इसे अपडेट किया गया है और उसमें विशाल विक्रम सिंह को पूर्व विधायक बताया गया है।

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