विश्व रक्तदान दिवस: प्रेरक है, शरद केसरवानी की कहानी; 35 साल में 65 बार ब्लड डेनोशन देकर प्रतापगढ़ का नाम किया रोशन
प्रतापगढ़। केसरवानी पुस्तक भंडार के स्वामी, पूर्व अध्यक्ष- रोटरी क्लब प्रतापगढ़ सेंट्रल, सदस्य- भारत विकास परिषद शाखा विशाल, उपाध्यक्ष- उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, शाखा- प्रतापगढ़ के विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए 56 वर्षीय शरद केसरवानी ने अभी तक 65 बार रक्तदान कर चुके हैं। ये छोटी-मोटी उपलब्धि नहीं, बल्कि ये जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि है। रक्तदान देना किसी को जीवनदान देने जैसा होता है। इसलिए जीवन में स्वस्थ रहते हुए रक्तदान करने की इच्छा को और मजबूत करना चाहिए, ताकि आपके द्वारा किये गये रक्तदान से किसी का जीवन बचाया जा सके।
स्वयं सेवक संघ से जुड़ने की वजह से शहर प्रतापगढ़ चौक घंटाघर से चंद कदम की दूरी पर प्रयागराज-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग- 330 पर केसरवानी पुस्तक भंडार का संचालन करते हुए शरद केसरवानी आज से लगभग 35 साल पहले सन- 1991 से रक्तदान करना प्रारंभ कर दिया। साल में कभी दो बार तो कभी तीन बार तो कभी चार बार तक शरद केसरवानी जी ने 21 वर्ष की आयु में ही रक्तदान करना शुरू कर दिए थे। अभी तक के जीवन में शरद केसरवानी 65 बार रक्तदान करने का जो कार्रय किया, वह अति सराहनीय व अनुकरणीय है। शरण केसरवानी जैसे ब्यक्ति से प्रेरणा मिलती है। उस प्रेरणा से जीवन में बहुत सारे बदलाव होते हैं।
ऐसा कार्य वही ब्यक्ति कर सकता है जो पूर्णतः निरोगित और स्वस्थ हो। वर्तमान परिवेश में ब्यक्ति स्वयं ही बीमार रहता है तो वह रक्तदान के लिए सोच ही नहीं पाता और उसका जीवन एक दिन स्वतः खत्म हो जाता है। रक्तदान करने वाले शरद केसरवानी से खुलासा इंडिया ने बातचीत किया तो उन्होंने बताया कि रक्तदान करने से कोई ब्यक्ति कमजोर नहीं होता, ये मानसिक बीमारी है कि रक्तदान कर देने से कोई ब्यक्ति कमजोर हो जाता है। सच तो यह है कि यदि कोई ब्यक्ति रक्तदान करता है तो उसे हार्ट अटैक जैसी घातक बीमारी नहीं आयेगी, क्योंकि रक्तदान करने से रक्त पतला हो जाता है और पूरे शरीर में उसका संचार बेहतर ढंग से होता है। रक्त मोटा होने से हर्ट अटैक का खतरा अधिक होता है।
यह बात सच है कि जिसके घर का जैसा माहौल रहता है, उस घर में बच्चे भी उसी वातावरण में रहते हुए उसी विचार के बन जाते हैं। इसीलिये परिवार का संस्कार ही बच्चे के जीवन की आधारशिला होती है। शरद केसरवानी कहते हैं कि रक्तदान महादान है। इससे किसी की जान बाख सकती है। इसी सोच के साथ वे निरंतर रक्तदान करते चले आ रहे हैं। उनकी प्रेरणा से उनका बेटा प्रत्युष केसरवानी भी अभी तक 19 बार रक्तदान कर चुका है। भतीजा हर्ष केसरवानी 8 बार और बेटी दिब्यांशी 3 बार रक्तदान कर चुकी है। ब्लड बैंक प्रभारी दीपिका केसरवानी ने शरद केसरवानी को नियमित रक्तदाता बतया। उन्होंने कहा कि शरद केसरवानी आपात स्थिति में भी तुरंत रक्तदान के लिए पहुँच जाते हैं।