जीवित पेंशनर को मृतक बताने पर रायबरेली के ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित, जांच के बाद कार्रवाई
रायबरेली : उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है, जिसमें एक जीवित वृद्ध महिला को मृत घोषित कर उसकी वृद्धावस्था पेंशन रोक दी गई। इस मामले में दोषी पाए गए ग्राम पंचायत अधिकारी अनूप कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अर्पित उपाध्याय के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) सौम्य शील सिंह ने की। मामला विकास खंड जगतपुर की ग्राम पंचायत हरदीटीकर का है, जहां निवासिनी सुखराना पत्नी देवदत्त ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे वर्ष 2024-25 में वृद्धावस्था पेंशन की दूसरी किस्त नहीं मिली है। अचानक पेंशन बंद होने से वह परेशान थी।
इस संबंध में उसने मुख्य विकास अधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ अर्पित उपाध्याय ने जांच के आदेश दिए, जिसके तहत डीपीआरओ सौम्य शील सिंह ने विस्तृत जांच की। जांच में पाया गया कि ग्राम पंचायत अधिकारी अनूप कुमार यादव ने बिना उचित दस्तावेजी सत्यापन के केवल ग्रामीणों के मौखिक बयानों के आधार पर सुखराना को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनकी पेंशन रोकने के लिए रिपोर्ट भेजी गई थी। इस पर सवाल उठे तो अनूप कुमार यादव को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
अपने जवाब में उन्होंने कहा कि गांव की चौपाल में कुछ ग्रामीणों ने बताया था कि सुखराना की मौत हो गई है, जिसके आधार पर उन्होंने यह रिपोर्ट तैयार की। हालांकि जांच में यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने न तो परिवार रजिस्टर चेक किया और न ही जन्म-मृत्यु पोर्टल की पुष्टि की। प्रशासन ने प्रमाणिक साक्ष्यों के आधार पर इस प्रकार की कार्रवाई को बेहद लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैया माना। इसी आधार पर डीपीआरओ ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अनूप कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इस घटना के बाद पंचायत विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
कर्मचारियों में यह संदेश साफ है कि किसी भी तरह की लापरवाही खासकर पेंशन जैसी जन कल्याणकारी योजनाओं में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी लाभार्थी की जानकारी का सत्यापन करते समय सभी सरकारी अभिलेखों का सत्यापन अवश्य किया जाए। यह मामला प्रशासनिक सतर्कता और जवाबदेही की मिसाल बन गया है। उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद अन्य अधिकारी भी अपने काम के प्रति अधिक सतर्क और संवेदनशील होंगे, ताकि लाभार्थियों को किसी तरह की असुविधा न हो और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।