‘अफसर खून से नहलाने आए’ केस में आजम खान बरीः अभी रामपुर जेल में ही रहेंगे; सबूतों के अभाव में कोर्ट से राहत
जेल में बंद सपा नेता आजम खान का भड़काऊ भाषण मामले में बरी हो गए हैं। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने गुरुवार को उन्हें सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। फैसले के दौरान आजम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। फैसले के बाद कोर्ट को शुक्रिया कहा। चूंकि, आजम दूसरे मामले में सजा काट रहे हैं। इसलिए उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना होगा। दरअसल, आप के प्रदेश प्रवक्ता फैसल खान लाला ने शहर कोतवाली में 2 अप्रैल 2019 को एक मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि आजम ने 29 मार्च 2019 को सपा प्रत्याशी के तौर पर सपा कार्यालय से भड़काऊ भाषण दिया। इसके जरिए तत्कालीन जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, एसडीएम सदर और सिटी मजिस्ट्रेट के खिलाफ लोगों को भड़काया गया।
आजम पर यह कहने का आरोप था कि चार अधिकारी जिस जिले से आए हैं, इन्होंने वहां पर गरीबों को तेजाब डालकर गलाया है। ये रामपुर को खून से नहलाना चाहते हैं। 17 नवंबर को रामपुर कोर्ट ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को फर्जी पैन कार्ड बनवाने के मामले में 7-7 साल की सजा सुनाई थी। दोनों अभी रामपुर जेल में बंद हैं। आजम 23 सितंबर को ही 23 महीने बाद जेल से जमानत पर बाहर आए थे। यानी 55 दिन बाद ही उन्हें वापस जेल भेज दिया गया। इससे पहले बर्थ सर्टिफिकेट मामले में 2 साल पहले यानी 2023 में आजम और उनकी पत्नी तंजीन और अब्दुल्ला को 7-7 साल की सजा हुई थी। आजम पर करीब 100 से ज्यादा केस दर्ज हैं।
पहले समझ लीजिए कि मामला क्या है…
सपा नेता आजम खान ने अपने पार्टी कार्यालय पर 2019 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान समर्थकों के बीच मंच से भड़काऊ भाषण दिया था। तत्कालीन डीएम, अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट पर भड़काऊ बयान देते हुए कहा था कि ये चार अधिकारी जिस जिले से आए हैं, वहां पर गरीबों को तेजाब डालकर गलाया है। ये रामपुर को खून से नहलाने आए हैं।
जिन अफसरों को लेकर आजम पर बयान देने का आरोप लगा था, उनमें तत्कालीन डीएम रामपुर आंजनेय कुमार सिंह (अभी मुरादाबाद मंडल के मंडलायुक्त), अपर जिलाधिकारी जगदम्बा प्रसाद गुप्ता (अब रिटायर), उप जिलाधिकारी पीपी तिवारी (रिटायरमेंट के बाद निधन हो चुका) और तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सर्वेश कुमार (अब मुरादाबाद में नगर आयुक्त) हैं।
ऊपरी अदालत में चैलेंज करेंगे: फैसल लाला
एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले को वादी फैसल लाला ने मामले को ऊपरी अदालत में चैलेंज करने की बात कही। कहा- हमें डर था कि कहीं उन अफसरों के साथ कोई अनहोनी न कर दी जाए। इसलिए मैंने केस दर्ज कराया था। आज जो फैसला आया है, मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं। मामले में ऊपरी अदालत में अपील करेंगे।