बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। दीपू चंद्र दास की हत्या के कुछ ही दिनों बाद अब एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। अमृत मंडल नाम के एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया है। घटना को लेकर आरोप है कि अमृत मंडल मंगलवार रात अपने कुछ साथियों के साथ एक स्थानीय निवासी शाहिदुल इस्लाम के घर कथित तौर पर पैसे वसूलने पहुंचा था। बांग्लादेश के प्रतिष्ठित अख़बार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, घरवालों ने शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के लोग मौके पर जुट गए और अमृत को घेर लिया। देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया और भीड़ ने अमृत की बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि अमृत के साथी मौके से फरार हो गए, जबकि सेलीम नामक एक व्यक्ति को हथियारों के साथ पकड़ लिया गया है। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं, अमृत मंडल के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और पूरे मामले की जांच जारी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि अमृत मंडल लंबे समय से भारत में छिपा हुआ था और हाल ही में बांग्लादेश लौटने के बाद कथित तौर पर फिरौती मांगने जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि इससे पहले मायमेनसिंह जिले में दीपू दास को ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा जिंदा जला दिया गया था। उस घटना की अंतरिम सरकार ने कड़ी निंदा की थी। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी कर कहा था कि “नए बांग्लादेश में इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” लेकिन अमृत मंडल की हत्या ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी पर अपराध के आरोप लगने के बाद भी भीड़ को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार है। खासकर ऐसे समय में, जब देश राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
इन घटनाओं के चलते बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है। साथ ही, धार्मिक अल्पसंख्यकों और मीडिया संस्थानों पर बढ़ते हमले अंतरिम सरकार के सामने कानून का राज बहाल करने की बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।