बेटा-बेटी, सास समेत 4 की मौतः कमरे में अंगीठी जलाकर सोए,उठे ही नही वाराणसी से छुट्टियां मनाने बिहार गए थे
वाराणसी के पीसीएस अफसर के मासूम बेटे, बेटी, सास और साढू के बच्चे की मौत हो गई। उनकी पत्नी और साले-साली की हालत गंभीर है। अफसर की पत्नी छुट्टियां मनाने बच्चों के साथ बिहार के छपरा गई थीं। ठंड से बचने के लिए परिवार शुक्रवार रात अंगीठी जलाकर सो रहा था।
देर रात दम घुटने के बाद परिवार के एक सदस्य को छटपटाहट महसूस हुई। उन्होंने किसी तरह कमरे का दरवाजा खोला। बाहर निकलकर घरवालों को बुलाया। घरवाले आए तो बाकी लोगों को जगाने की कोशिश की। देखा तो 4 लोगों में कोई हलचल नहीं हो रही थी।
घरवाले सभी को छपरा के सदर अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने 4 को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में पीसीएस अफसर का 3 साल का बेटा तेजस, 7 महीने की बेटी गुड़िया, सास कमलावती देवी (70) और साढू का 4 साल का बेटा अध्याय है।
वहीं, साले अमित कुमार, उनकी पत्नी अंजलि और साली अमीषा की हालत गंभीर है। अमीषा अध्याय की मां हैं। सभी को छपरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से तीनों को पटना रेफर किया गया है। घटना छपरा के भगवान बाजार थाना क्षेत्र की है। पीसीएस अफसर विजय कुमार सिंह अभी जौनपुर में तैनात हैं। सूचना मिलते ही वह छपरा पहुंचे। अस्पताल में पीसीएस अफसर विजय कुमार सिंह अपनी बेटी के चेहरे से कफन हटाकर फफक-फफक कर रो पड़े।
एक कमरे में सो रहा था पूरा परिवार
कमलावती देवी छपरा की अंबिका कॉलोनी में रहती थीं। उनके पति की मौत हो चुकी है। उनके बेटे अमित वाराणसी में रहते हैं। वहीं, बेटी अंजलि की शादी वाराणसी में पीसीएस अफसर विजय कुमार सिंह से हुई थी। कमलावती कई दिन तक बेटे अमित के पास रहने के बाद हाल ही में छपरा लौटी थीं। ठंड की छुट्टी में कमला की दोनों बेटियां अमीषा और अंजलि भी मां से मिलने बच्चों के साथ छपरा आई थीं।
घरवालों ने बताया- शुक्रवार रात ठंड ज्यादा थी। रात करीब 10 बजे खाना खाने के बाद सभी सोने की तैयारी करने लगे। फर्स्ट फ्लोर के एक कमरे में परिवार के 7 लोगों ने साथ सोने का फैसला किया। ठंड से बचने के लिए कमरे में अंगीठी जला दी। इसके बाद कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। सभी खिड़कियां भी बंद थीं, जिससे ठंडी हवा न आए।
गहरी नींद से घुटन महसूस नहीं हुई
देर रात तक अंगीठी जलती रही, जिससे कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड (को) गैस फैल गई। धीरे-धीरे ऑक्सीजन कम होती चली गई। गहरी नींद के चलते किसी को इसका आभास नहीं हो सका। शनिवार सुबह सुबह करीब 5-6 बजे परिवार के एक शख्स को छटपटाहट महसूस हुई।
उसने किसी तरह खुद को संभाला और कमरे का दरवाजा खोला। आवाज लगाकर लोगों को बुलाया। आनन-फानन में सभी को छपरा सदर अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद कमलावती देवी, तेजस, अध्याय और गुड़िया को मृत घोषित कर दिया।
अंजलि को अभी यह नहीं बताया गया है कि उनके दोनों बच्चों की मौत हो चुकी है। घटना की जानकारी मिलते ही छपरा एएसपी राम पुकार सिंह सहित कई सीनियर अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल की जांच कर घरवालों से पूछताछ की।
गहरी नींद से घुटन महसूस नहीं हुई
देर रात तक अंगीठी जलती रही, जिससे कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड (को) गैस फैल गई। धीरे-धीरे ऑक्सीजन कम होती चली गई। गहरी नींद के चलते किसी को इसका आभास नहीं हो सका। शनिवार सुबह सुबह करीब 5-6 बजे परिवार के एक शख्स को छटपटाहट महसूस हुई।
उसने किसी तरह खुद को संभाला और कमरे का दरवाजा खोला। आवाज लगाकर लोगों को बुलाया। आनन-फानन में सभी को छपरा सदर अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद कमलावती देवी, तेजस, अध्याय और गुड़िया को मृत घोषित कर दिया।
अंजलि को अभी यह नहीं बताया गया है कि उनके दोनों बच्चों की मौत हो चुकी है। घटना की जानकारी मिलते ही छपरा एएसपी राम पुकार सिंह सहित कई सीनियर अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल की जांच कर घरवालों से पूछताछ की।