किसने तैयार किया यूपीएसआई परीक्षा का प्रश्नपत्र, परीक्षा में जो प्रश्न पत्र सार्वजनिक हुआ, वह बेहद आपत्तिजनक है
अब सवाल उठता है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र बनाने का पूरा प्रॉसेस क्या है ? कौन इस पर अंतिम मुहर लगाता है ? अगर सब कुछ फुलप्रूफ है तो इस तरह के बेजा सवाल कैसे, किसी प्रश्नपत्र का हिस्सा बन जाते हैं ? इस तरह के प्रश्न पत्र बनाने वाले आखिर कौन लोग हैं, जो समाज में ब्राह्मण जाति को लगातार टारगेट करके कुचक्र रचते हुए नफरत फैलाने और उन्हें अपमानित करने का काम कर रहे हैं…

उत्तर प्रदेश उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में सवाल में पंडित शब्द इस्तेमाल करने पर पैदा हो गया है, विवाद
UP Police SI Exam Controversy: उत्तर प्रदेश सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में आए प्रश्न को लेकर विवाद हो गया है। सवाल के जवाब के विकल्प पंडित शब्द लिखा है, यही विवाद की जड़ है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्र ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है तो डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक आपत्ति जताई है।
अब सवाल है कि इस परीक्षा का प्रश्न पत्र कौन तैयार करता है, कौन मुहर लगाता है और इस गलती के लिए कौन दोषी है ? जानिए इनके जवाब- उत्तर प्रदेश उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न के जवाब से बखेड़ा खड़ा हो गया है. सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्र ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी एक सवाल के जवाब में दिए गए विकल्प पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। वे खुद किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों के खिलाफ हैं। भाजपा सभी का आदर करती है।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से 14 और 15 मार्च 2026 के लिए चार पालियों में उप निरीक्षक भर्ती की परीक्षा का आयोजन किया गया। 14 मार्च को बांटे गए प्रश्न पत्र सामान्य हिन्दी में तीन नंबर पर पूछा गया सवाल है- अवसर के अनुसार बदल जाने वाला इस वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए। इसके जवाब में चार ऑप्शन दिए गए हैं- ए-पंडित, बी-अवसरवादी, सी-निष्कपट, डी-सदाचारी।
बस इसी सवाल और जवाब में पंडित शब्द के उपयोग ने बवाल कर दिया है। परीक्षा 15 मार्च को भी दो पालियों में होगी. इस परीक्षा में लगभग 45 सौ पदों के लिए करीब 15 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। राज्य के सभी जिलों में लगभग ग्यारह सौ केंद्र बनाए गए हैं। इस मामले में सरकार या बोर्ड क्या फैसला लेगा, यह वही जानें लेकिन इस तरह के हल्के सवाल से प्रश्नपत्र की पवित्रता पर सवाल उठता है।
योगी सरकार को अस्थिर करने के उद्देश्य से स्वयं भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लगातार कार्य करने में लगा हुआ है। मुख्यमंत्री पद से योगी आदित्यनाथ को हटाने में दिल्ली दरबार का हर कदम अभी तक विफल रहा है। पहले यूजीसी काले कानून को लाकर सवर्ण जाति को योगी सरकार के खिलाफ करने का षड्यंत्र उजागर हो चुका है। दिल्ली दरबार का दाँव उल्टा पड़ गया। इसे भाँपते हुए सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कोई विरोध नहीं किया और स्टे ऑर्डर होने दिया।
विपक्ष की सारी भूमिका स्वयं दिल्ली दरबार ही निर्वहन कर रही है। योगी को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए दिल्ली दरबार चाल पर चाल चले जा रही है। आम जनता हर चाल को समझ भी रही है। दिल्ली दरबार की चाल कहीं उसे कालिदास न बना दे। क्योंकि किसी भी चीज की अति खराब होती है।
देश के अंदर हर जगह ब्राह्मण को ही निशाना बनाया जा रहा है। आखिर क्यों ? ब्राह्मण कोई भिखारी नहीं है कि वह किसी की भिक्षा पर आश्रित है। सच बात तो यह है कि ब्राह्मण के बिना शासन सत्ता न कभी संचालित हुई है और न कभी संचालित हो सकेगी। भूकने के लिए कोई भी भूकता रहे। उसे पूरी छूट है।