30 जून तक कागज के नोट वापस लेगा आरबीआई,इस पर आया सरकार का बयान
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से इस तरह की खबरें चल रही थीं कि केंद्रीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पेपर करेंसी को वापस लेने वाली है। खबरों में ये भी दावा किया जा रहा था कि इसकी जगह प्लास्टिक के नोट लाने की योजना है। अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस पूरे प्रकरण पर सफाई दी है।
जानें क्या है मामला
सोशल मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था कि भारतीय रिजर्व बैंक 30 जून तक पेपर करेंसी यानी जो नोट अभी चलन में हैं,उनको वापस लेने और उनकी जगह प्लास्टिक के नोट लाने की योजना बना रहा है।इसके बाद से लोगों की टेंशन बढ़ गई थी।हालांक आरबीआई की तरफ से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है और देश में मौजूदा कागजी मुद्रा का चलन जारी रहेगा।
पीआईबी का फैक्ट चेक
प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी)ने भी अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल पर एक फैक्ट-चेक जारी किया,जिसमें स्पष्ट किया गया कि ये अफवाहें बेबुनियाद हैं।पीआईबी ने लोगों से घबराहट और ऐसी अपुष्ट अफवाहों को न फैलाने का आग्रह किया।पीआईबी ने एक्स पर कहा कि कई सोशल मीडिया पोस्ट में गलत दावा किया जा रहा है कि रिजर्व बैंक 30 जून 2026 से कागजी मुद्रा नोटों को वापस ले लेगा और उनकी जगह प्लास्टिक मुद्रा नोट लाएगा। पीआईबी ने एक वीडियो भी साझा किया, वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज की फेक वीडियो में दावा किया गया था कि 30 जून से कागजी मुद्रा नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।अधिकारियों ने कहा कि मैसेजिंग ऐप्स पर संवेदनशील फाइनेंशियल खबरें फॉरवर्ड करने से पहले नागरिकों को सावधानी बरतनी चाहिए।करेंसी निकालने के बारे में गलत जानकारी से अक्सर व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच बेवजह कन्फ्यूजन और चिंता पैदा होती है। सरकार ने लोगों को सलाह दी कि वे सिर्फ आधिकारिक कम्युनिकेशन चैनलों पर ही भरोसा करें।
पॉलिमर नोटों को लेकर मिले संकेत
बीते दिनों भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिमर से बने नोट लाने के संकेत दिए। मल्होत्रा ने कहा कि यह प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है।मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पॉलिमर नोट लाने के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और आरबीआई इसकी व्यवहार्यता का आकलन कर रहा है।
मल्होत्रा ने कहा कि इस संबंध में प्रकाशित खबरों में कुछ हद तक सच्चाई है,लेकिन अभी इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मल्होत्रा ने कहा कि पॉलिमर नोट ऐसे मुद्रा नोट होते हैं,जो कागज की जगह खास प्लास्टिक पॉलिमर से बनाए जाते हैं। ये सामान्य नोटों से ज्यादा मजबूत एवं टिकाऊ होते हैं, पानी से खराब नहीं होते और इनमें बेहतर सुरक्षा फीचर होने से नकली नोट बना पाना मुश्किल होता है। बता दें कि फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये मूल्यवर्ग के एक अरब पॉलिमर नोटों को देश के पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा। इस परीक्षण के लिए कोच्चि,मैसूर,जयपुर,शिमला और भुवनेश्वर का चयन किया गया था। हालांकि तकनीकी एवं परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस पहल को बाद में रोक दिया गया था।