प्रतापगढ़ में एसडीएम की पिटाई से नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद मेडिकल कालेज परिसर में देर रात्रि तक जमकर होता रहा हंगामा, पीछे के दरवाजे से भाग खड़े हुए मेडिकल कालेज के प्राचार्य देश दीपक आर्य

मेडिकल कालेज परिसर ने आक्रोशित कर्मचारियों ने ओटी का दरवाजा तोड़ने का भी प्रयास किया, उन्होंने नायब नाजिर के मौत के बाद शव को जबरन ओटी में रखने का आरोप लगाया, कर्मचारियों का आरोप है कि सुनील कुमार शर्मा की मौत के बाद दो घंटे से ओटी में शव को रखकर हत्यारोपी SDM के बचाव से नाराज हो रहा था,आम जनमानस…  

उत्तर प्रदेश के जनपद प्रतापगढ़ के लालगंज तहसील में तैनात नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा की इलाज के दौरान मौत हो जाती है, तहसील में तैनात नायब नाजिर ने उपजिलाधिकारी पर मारपीट करने का आरोप लगाया था और लहूलुहान हालत में वह बृहस्पतिवार 31 मार्च को एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाता रहा। उधर, एसडीएम ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि नायब नाजिर नशे में धुत होकर आए दिन हंगामा करता है। यदि एसडीएम लालगंज की यह बात थोड़ी देर के लिए मान भी ली जाए तो क्या वह इस बात को सिद्ध कर सकते हैं कि उन्हें देश के संविधान ने शराब पीकर हंगामा करने वाले ब्यक्ति को जान से मारने का अधिकार प्रदान किया हुआ है ? यदि नहीं तो वह अपने ही अधीनस्थ कर्मचारी को इतनी बेरहमी से पिटाई कर डाली कि उसकी तीन दिन बाद मौत हो जाती है। नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा के साथ एक जगह नहीं बल्कि तीन जगह अमानवीय ब्यवहार किया गया,जिससे उसकी दर्दनाक मौत हुई।पहले एसडीएम लालगंज के द्वारा बेरहमी से पिटाई करना, दूसरा उसकी बात का भरोसा न कर उल्टे एसडीएम लालगंज का जिला प्रशासन द्वारा बचाव करना और तीसरा समय से नायब नाजिर का इलाज न करना उसकी मौत का कारण बना। नायब नाजिर की मौत के बाद भी स्वास्थ्य महकमा और जिला प्रशासन इंसानियत का तमाशा बनाता रहा।

साथी कर्मचारी की मौत पर एसडीएम लालगंज ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह यादव पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी सहित उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने की भी उठ रही है,मांग…

हत्यारोपी एसडीएम लालगंज ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह यादव का बचाव करने में जिलाधिकारी प्रतापगढ़ का जब अपना हाथ जलने लगा तो वह देर शाम उन्हें लालगंज से हटाकर जिला मुख्यालय अटैच किये। हंगामे के बाद गंभीर धाराओं के साथ हत्या का मुकदमा ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह यादव पर लालगंज कोतवाली में देर शाम दर्ज किया गया। हत्यारोपी ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह यादव की गिरफ्तारी पुलिस कर सकी या नहीं यह अभी आधिकारिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया है, परन्तु सूत्रों के अनुसार स्वाट टीम ने हत्यारोपी ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह यादव को भागने से पहले दबोच लिया था। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को यह डर सताने लगा था कि यदि मामला हाईलाइट हुआ और कहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी मामले का संज्ञान ले लिए और पूँछ बैठे कि हत्यारोपी ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह यादव को जेल भेजा गया कि नहीं ? फिर तो इस यक्ष प्रश्न का जवाब किसी के पास न होगा। ऐसी दशा में हत्यारोपी एसडीएम को बचाने के चक्कर में कहीं जिले के दोनों बड़े हाकिम ही शिकार न हो जाए। इसलिए एहतियातन हत्यारोपी ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह यादव को भागने से पहले टीम द्वारा दबोच लिया गया है। हालांकि पुलिस अभी तक हत्यारोपी ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह यादव की गिरफ्तारी को जाहिर नहीं किया है।  

 

लालगंज तहसील जो कांग्रेस के कथित दिग्गज नेता प्रमोद कुमार की कर्म स्थली है और वह उनके दिलों में बसती है,परन्तु कभी-कभी कांग्रेस के कथित दिग्गज नेता प्रमोद कुमार और उनकी विधायक बेटी को साँप सूंघ जाता है और वह अपने मुंह पर टेप चिपका लेते हैं। लालगंज का क्षेत्र मीडिया की सुर्ख़ियों में अक्सर लाल सुर्ख बना रहता है। यहाँ पर तैनात नौकरशाही भी निरंकुश रहती है। यहाँ की नौकरशाही सिर्फ प्रमोद कुमार की चरण बंदना कर ले, फिर चाहे जो करे। कभी यहाँ पर तैनात एसडीएम विनीत उपाध्याय अपने सुरक्षा गार्डों से उनके राइफल छीनकर अधिवक्ताओं पर तान दी थी। यह तो कुशल था कि वह राइफल चली नहीं, अन्यथा दो-चार की जान भी जा सकती थी। तत्कालीन जिलाधिकारी महोदय ने लालगंज के तत्कालीन एसडीएम विनीत उपाध्याय को मुख्यालय अतिरिक्त एसडीएम बनाकर डैमेज कंट्रोल से बचने का कार्य किया गया था। कुछ दिन बाद वही एसडीएम साहेब जिलाधिकारी प्रतापगढ़ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उनके ही आवासीय परिसर में बने कैम्प कार्यालय में धरने पर बैठ गए थे, जिन्हें शासन ने सस्पेंड कर राजस्व परिषद में अटैच कर दिया था तब कहीं जाकर विनीत उपाध्याय का बुखार उतरा था। अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ होगा। जो स्वयं भ्रष्ट रहा हो वह जिलाधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये, यह बात शासन को नागवार लगी और शासन ने SDM रहे विनीत उपाध्याय की गर्मी निकाल दी।      

 

इस बार लालगंज एसडीएम ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह जो वास्तव में सिंह यानि क्षत्रिय नहीं है, बल्कि यादव यानि अहीर जाति से हैं और योगी सरकार में क्षत्रिय बनाकर तैनाती पाकर उन्हीं की सरकार को बदनाम करने का कार्य कर रहे हैं। लालगंज एसडीएम ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह यादव की जाहीलियत उस समय देखने को मिली जब वह अपने ही अधीनस्थ नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा की ऐसी पिटाई कर डाली कि उसके शरीर की खाल उधड़ गई और डंडे के निशान शरीर पर उपट आये। वह नगर स्थित सरकारी आवास में रहता है। बृहस्पतिवार को सुबह करीब 11 बजे वह तहसील पहुंचा और एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह पर मारपीट करने का आरोप लगाने लगा। अधिवक्ताओं के साथ ही मीडियाकर्मियों को वह अपनी लहूलुहान पीठ दिखाता रहा। उसकी पीठ पर लाठी-डंडों के निशान थे। एसडीएम पर मारपीट का आरोप लगाते हुए वह तहरीर लेकर काफी देर घूमता रहा। आरोप है कि सुनील कुमार शर्मा (50) बुधवार 30 मार्च को रात करीब 9 बजे अपने आवास के बाहर बैठा था। तभी एसडीएम ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह पहुंचे और होमगार्ड के डंडे से उसे मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। एसडीएम की पिटाई से वह गिरकर बेहोश हो गया। इसके बाद एसडीएम वहां से चले गए।

 

सवाल उठता है कि एसडीएम लालगंज अपने नायब नाजिर की पिटाई इतनी बेरहमी से क्यों की ? इसका जवाब तो एसडीएम साहेब ही दे सकते हैं, परन्तु अभी तक एसडीएम से अपनी सफाई में कुछ नहीं कह सके हैं। उधर एसडीएम लालगंज की पिटाई से आहत सुनील कुमार शर्मा घटना के संबंध में गुरुवार को कोतवाली पहुंचकर तहरीर दी। पुलिस ने न तो उसकी रिपोर्ट लिखी और न मेडिकल ही कराया। घायल सुनील कुमार शर्मा की खबर जब सुर्खियां बनी तो जिलाधिकारी प्रतापगढ़ ने मामले को संभालने के लिए एडीएम मुकेश चंद्र को लगाया जिसके बाद पीड़ित नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा का मेडिकल मोयना हो सका। पीड़ित सुनील कुमार शर्मा का देर शाम एडीएम के निर्देश पर जिला अस्पताल में उसकी चोटों का मेडिकल मोयना किया गया, जिसमें कुल आठ चोटें निकली थी। इतने के बाद भी नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा की तहरीर पर मुकदमा नहीं दर्ज हो सका। जिला प्रशासन और पुलिस महकमा अपने एसडीएम ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह का बचाव करता दिखा और दिखाने के लिए जिलाधिकारी प्रतापगढ़ डॉ नितिन बंसल ने सम्पूर्ण घटना की जाँच मुख्य राजस्व अधिकारी के सुपर्द करके डैमेज कंट्रोल करने की तरफ कार्य शुरू किया। उन्हें इतना आभास न हो सका कि चोटहिल नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा की मौत भी हो सकती है।   

 

जिला प्रशासन और पुलिस महकमा का अंदाजा उल्टा साबित हुआ। घायल सुनील कुमार शर्मा का इलाज लालगंज के ट्रामा सेंटर में भर्ती करके शुरू किया गया। दो दिन तक नाटकीय ढंग से लालगंज में नायब नाजिर का इलाज किया गया, परन्तु जब नायब नाजिर की तबियत बिगड़ने लगी तो जिला प्रशासन के हाथ पाँव फूलने शुरू हुए और उस दशा में जिला प्रशासन नायब नाजिर को जिला मुख्यालय पर राजकीय मेडिकल कालेज में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया, परन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी थी और नायब नाजिर की हालत बिगड़ती जा रही थी। मेडिकल कालेज के प्राचार्य भी आनन-फानन में मेडिकल कालेज पहुंचे और वह मीडिया के लोगों को ही कैम्पस से बाहर चले जाने का तुगलकी फरमान सुना डाला। नायब नाजिर को लेकर अब तक जिला प्रशासन और पुलिस महकमा बेचैन था और अब स्वास्थ्य महकमा भी शामिल हो गया। ताज्जुब की बात यह रही कि जिस एसडीएम ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह पर नायब नाजिर ने आरोप लगाया था कि उसकी बेरहमी से उसने पिटाई की है, वही एसडीएम नायब नाजिर की तबियत खराब होने की सूचना पर मेडिकल कालेज पहुंचकर डॉक्टर की पोशाक पहनकर नायब नाजिर के सीने में पम्प करते देखे गए। सवाल उठता है कि जो आरोपी हो उसे स्वास्थ्य महकमा अपनी पोशाक किस अधिकार से पहनाकर उस मरीज के इलाज का हिस्सा बनाया ? क्या नायब नाजिर की मौत का जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग भी है जो समय से उसका इलाज नहीं किया और अंत तक टाल मटोल करता रहा।          

 

राजकीय मेडिकल कालेज प्रतापगढ़ में इलाज के दौरान नायब नाजिर की दुःखद मौत हो गयी, परन्तु निकम्मा  स्वास्थ्य  जो जिला प्रशासन का तलवा चाटता है, वह नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा की मौत की अधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहा था। इलाज कर रही चिकित्सकीय टीम ऑफ दि रिकार्ड नायब नाजिर के घरवालों को सुनील कुमार शर्मा की मौत की सूचना दी तो परिजनों ने इस बात को कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों के बताया और उनके जरिये सूचना मीडिया को हुई। थोड़ी देर में जब राजकीय मेडिकल कालेज परिसर में कलेक्ट्रेट और तहसील के कर्मचारियों, अधिवक्ताओं एवं मीडियाकर्मियों की भीड़ एकत्र हुयी तो स्वास्थ्य महकमा पुनः नायब नाजिर को ऑपरेशन थियेटर में लेकर चले गए और बाहर एकत्र भीड़ द्वारा मुर्दाबाद के नारे लगने लगे तो मौके की नजाकत को भांपते हुए पुलिस भी कमान संभाल लिया। जो पुलिस चार दिन मुकदमा लिखने के लिए बहाना बनाती रही, वही पुलिस नायब नाजिर की मौत के बाद बैकफुट लोटते हुए दिखी और असहाय स्थिति में मौजूद भीड़ से यह कहती रही कि नायब नाजिर के घरवाले तहरीर दे तो हम फ़ौरन मुकदमा लिख लेंगे। घंटों तक यह हाई बोल्टेज ड्रामा मेडिकल कालेज परिसर में होता रहा। कर्मचारी संगठनों की जिद के आगे जिलाधिकारी प्रतापगढ़ डॉ नितिन बंसल देर रात्रि लगभग 11 बजे पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल के साथ राजकीय मेडिकल कालेज पहुँचे, जहाँ नाराज लोगों को आश्वासन देने के बाद ही नायब नाजिर का शव मोर्चरी के लिए ले जाया जा सका। जिलाधिकारी प्रतापगढ़ के निर्देश पर रात्रि में ही नायब नाजिर का पोस्टमार्टम करा दिया गया।    

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