इंडियन प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन को-ऑपरेटिव लिमिटेड’ नामक से संस्था से इसके भाई प्रदीप कुमार गोयल ने 2 राज्यों में जमकर घोटाला किया है और अपने सगे छोटे भाई सुनील गोयल के सहयोग से शासन में फर्ज़ी रिपोर्ट भेज दी है कि इस नाम का कोई व्यक्ति प्रतापगढ़ में नहीं है। प्रदीप कुमार गोयल ने कुर्की से बचने के लिए प्रतापगढ़ में बंटवारें में मिली बजाजा रोड़ पर गोयल फुट बियर की दुकान को लाखों रूपये में बेंच दिया और वह पैसा बहुत ही चालाकी से अपनी पत्नी व बच्चों के नाम से राजधानी लखनऊ में एक आशियाना और दुकान की ब्यवस्था कर दी, ताकि उसके द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को सरकार किसी भी दशा में रिकवर न कर सके…

ललितपुर के साथ ही प्रदीप कुमार गोयल को सूबे के कई जनपदों में हेल्थ एवं वैलनेस सेंटर के नाम पर कई लाख रूपये का काम लिया और उसको भी यह कर गया, हजम
जिलाधिकारी ललितपुर, आईजी महोदय, झाँसी रेंज, आयुक्त महोदय, झांसी मंडल, झांसी, उत्तर प्रदेश। ‘इंडियन प्रोजेक्ट्स एंड कंस्ट्रक्शन को-ऑपरेटिव लिमिटेड’ एवं प्रदीप कुमार गोयल द्वारा स्वास्थ्य विभाग के निर्माण कार्यों में गबन तथा पूर्व में सांसद निधि घोटाले के संबंध में उच्च स्तरीय जांच एवं कठोर कार्रवाई किये जाने की शिकायत हुई है। स्वतंत्र पत्रकार जय प्रकाश अवस्थी द्वारा उच्च स्तरीय जांच एवं कठोर कार्रवाई किये जाने की मांग से घोटालेबाजों में फिर से हडकंप मच गया है। चूँकि बिना अधिकारियों की मिलीभगत से कोई भी घपला और घोटाला नहीं किया जा सकता है। इसलिए इस घोटाले में संलिप्त अधिकारियों में भी बेचैनी मचना तय है।

प्रदीप कुमार गोयल बड़ा नटवरलाल है, उसके खिलाफ उत्तराखण्ड सहित यूपी के बरेली में दर्ज हुई है, प्राथमिकी
जय प्रकाश अवस्थी, स्वतंत्र पत्रकार ने शिकायत किया है कि ललितपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों (सी०एच०ओ० कक्ष) के निर्माण कार्य में हुई गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जाँच के लिए शिकायती पत्र लिख कर मांग किया है कि ललितपुर जिले में कुल 10 नग हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के निर्माण हेतु ‘इंडियन प्रोजेक्ट्स एंड कंस्ट्रक्शन को-ऑपरेटिव लिमिटेड’ को कार्य आवंटित किया गया था, जिसकी अनुमानित लागत 42.5 लाख रुपये थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक बार सरकारी धन के आवंटन में घपले और घोटाले करके धन का बंदरबांट कर ले, फिर उस दशा में उस संस्था को पुनः दूसरा काम कैसे आवंटित कर दिया जाता है ?

वर्ष- 2019 में राज्यसभा सांसद राज बब्बर की ‘सांसद निधि’ के 37 लाख रुपये हड़पने का है, आरोप
आरोप है कि संस्था के प्रतिनिधि प्रदीप कुमार गोयल द्वारा बिना कार्य पूर्ण किए ही लगभग 26 लाख रुपये की सरकारी धनराशि का गबन कर लिया गया है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ललितपुर) द्वारा भी संस्था को अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किया गया है। अत्यंत गंभीर विषय यह है कि यह वही संस्था और प्रदीप कुमार गोयल हैं, जिन पर वर्ष- 2019 में राज्यसभा सांसद राज बब्बर की ‘सांसद निधि’ के 37 लाख रुपये हड़पने का आरोप है और उक्त मामले में देहरादून में मुकदमा पहले से ही पंजीकृत है। आखिर इन घोटालेबाजों के खिलाफ जब मुकदमा लिख दिया गया तो उस पर अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं हो सकी ?

11 जून, 2026 को इंडियन प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन को-ऑपरेटिव लिमिटेड’ को सहकारिता मंत्रालय द्वारा कर दिया गया है, परिसमापन
यह अत्यंत विचारणीय और जांच का विषय है कि एक दागी संस्था, जिस पर पूर्व में सरकारी धन के गबन का मुकदमा चल रहा है, उसे पुनः सरकारी कार्यों का ठेका कैसे मिला और किन परिस्थितियों में बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के उन्हें इतना बड़ा भुगतान कर दिया गया ? शिकायतकर्ता ने मांग किया है कि इस पूरे प्रकरण को संज्ञान लेते हुए एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच गठित की जाए। साथ ही, दोषी संस्था और उसके प्रतिनिधि के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ताकि सरकारी धन की लूट पर रोक लग सके और दोषियों को सजा मिल सके।