सरकारी धन से पूर्व जनप्रतिनिधि का प्रचार? मांधाता क्षेत्र पंचायत के कार्यों पर उठ रहे गंभीर सवाल
प्रतापगढ़। मांधाता क्षेत्र पंचायत निधि से निर्मित कराए गए विभिन्न सार्वजनिक कार्यों पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य की तस्वीर और नाम प्रदर्शित किए जाने को लेकर क्षेत्र में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास वर्तमान में कोई निर्वाचित या प्रशासनिक पद नहीं है, तो फिर सरकारी धन से बने कार्यों पर उसका प्रचार-प्रसार आखिर किस नियम और किसकी अनुमति से किया गया?
क्षेत्र में बने यात्री शेड, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और अन्य विकास कार्यों पर लगे बोर्डों को देखकर लोगों के मन में कई सवाल पैदा हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी धन से निर्मित कार्यों को किसी पूर्व जनप्रतिनिधि के व्यक्तिगत प्रचार का माध्यम बनाया जा सकता है? यदि नहीं, तो फिर इतने लंबे समय से यह सब कैसे चलता रहा?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक धन से किए गए विकास कार्य जनता की संपत्ति होते हैं। उन पर शासन, विभाग अथवा अधिकृत अधिकारियों की जानकारी प्रदर्शित की जा सकती है, लेकिन किसी पूर्व पदाधिकारी या निजी व्यक्ति का प्रचार किया जाना नैतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से सवाल खड़ा करता है।
लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या क्षेत्र पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस प्रकार के बोर्ड लगाने की अनुमति दी थी? यदि अनुमति दी गई थी तो किस नियम के तहत दी गई? और यदि अनुमति नहीं थी तो फिर संबंधित अधिकारियों ने इसे हटाने या रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं की?
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा है कि सरकार एक ओर भ्रष्टाचार और संसाधनों के दुरुपयोग पर जीरो टॉलरेंस नीति की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक परिसंपत्तियों पर निजी या राजनीतिक छवि निर्माण के आरोप लगातार सामने आते रहते हैं। ऐसे में सवाल केवल एक बोर्ड या एक तस्वीर का नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के उपयोग की पारदर्शिता का है।
जानकारों का कहना है कि यदि किसी सरकारी परियोजना या सार्वजनिक निर्माण कार्य पर नियमों के विपरीत किसी व्यक्ति का प्रचार किया गया है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह भी जांच का विषय है कि बोर्डों और प्रचार सामग्री पर खर्च किस मद से किया गया तथा उसकी स्वीकृति किस स्तर पर दी गई।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि जिला प्रशासन, मुख्य विकास अधिकारी और संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। यह स्पष्ट किया जाए कि मांधाता क्षेत्र पंचायत निधि से हुए कार्यों पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य का नाम और फोटो किस अधिकार और किस अनुमति के आधार पर प्रदर्शित किए गए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जनता के बीच अब यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि आखिर सरकारी धन से बने कार्यों पर प्रचार का अधिकार किसे है जनता को जवाबदेह व्यवस्था को या फिर ऐसे लोगों को जो वर्तमान में किसी पद पर भी नहीं हैं?