प्रतापगढ़ में जिसकी लाठी, उसकी भैंस की कहावत को चरितार्थ करने में जिला प्रशासन की रहती है, सहमति

दबंगों की दबंगई के आगे किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में दिखता है, जिला प्रशासन
प्रतापगढ़। शहर के बीचोंबीच कोतवाली नगर के भगवा चौकी से चंद कदम दूर भगवा चुंगी से कचेहरी रोड़ पर रॉयल गार्डेन के सामने गायत्री गुप्ता पत्नी हरिश्चंद्र गुप्ता के घर के पास जबरन कब्जा करने की नियत से कुछ लोग रात्रि में JCB से खुदाई करने लगे। आपात सेवा UP-112 पर शिकायत हुई तो मौके पर पहुंचकर पुलिस ने काम रोकवा दिया। शिकायत के आधार पर इवेंट आई डी- P24052634061 दर्ज हुई।
दूसरे दिन राजस्व टीम से हल्का लेखपाल और पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर दोनों पक्ष से बातचीत कर जमीन के संबंध में मालिकाना हक से सम्बन्धित कागजात लिए और हल्का लेखापाल सुशील कुमार मिश्रा द्वारा जॉइंट रिपोर्ट प्रेषित की गई। मई माह का अंतिम सप्ताह होने की वजह से हरिश्चंद्र गुप्ता डर गए कि कहीं दूसरा पक्ष दबंगई दिखाते हुए उसकी जमीन जबरन हथिया लेगा तो उसके लिए समस्या होगी।

आबादी की भूमि में राजस्व टीम को पैमाइश करने का नहीं होता, अधिकार
माह जून में सिविल कोर्ट एक माह के लिए बंद होने की दशा में कहीं रात्रि में जबरन कब्ज़ा न कर लें, इस डर से सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के न्यायालय में वाद संख्या- 83/2026 हरिश्चन्द्र गुप्ता बनाम सगीर अहमद आदि दिनांक- 29/05/2026 दायर हुआ, जिसमें अगली तारीख पेशी दिनांक- 07/07/2026 निर्धारित हुई है।
फिलहाल उक्त वाद में विपक्ष आयशा हाजिर है। फिर भी सगीर अहमद आदि लोग अपने दबंगई और प्रभाव में जबरन उक्त जमीन कब्जा करना चाहते हैं, जिसके लिए उप जिला मजिस्ट्रेट सदर प्रतापगढ़ को अपने प्रभाव के माध्यम से उन्हें प्रभावित करके अपना काम साधने के फ़िराक में हैं। कल दोपहर में उप जिला मजिस्ट्रेट सदर प्रतापगढ़ मय राजस्व टीम मौके पर पहुँची थी और सगीर अहमद आदि द्वारा उन्हें गुमराह करके प्रकरण को समझाया गया, जबकि मामला कुछ और ही है। पर अपना मकसद साधने के लिए सबसे आसान होता है अधिकारियों को गुमराह करना।
हरिश्चंद्र गुप्ता ने राजस्व टीम द्वारा मौके की पूर्व में हुई पैमाइश की एक रिपोर्ट पेश की जिसे देखकर विपक्ष के सगीर अहमद आदि हैरान हो गए, क्योंकि राजस्व टीम द्वारा मौके की पूर्व में हुई पैमाइश की आख्या दिनांक- 10/08/2009 में नायब तहसीलदार सिटी और राजस्व निरीक्षक व हल्का लेखपाल द्वारा की गई पैमाइश की संयुक्त आख्या में माना गया है कि गाटा संख्या- 120 मि. व गाटा संख्या- 121 मि. अगल-बगल है। मौके पर पूर्णरूपेण आबादी बसी हुई है। नियमतः जहाँ आबादी बसी होती है, वहां राजस्व विभाग की टीम पैमाइश करने का अधिकार नहीं रखती।
स्थलीय पैमाइश में पाया गया कि मौके पर दोनों पक्षों की भूमि दर्ज रकबे से कम है। दोनों पक्षों के मध्य तीन फिट का गलियारा है, उसी गलियारे का विवाद है। दोनों पक्ष अपना-अपना बता रहे हैं। यदपि वर्तमान समय में स्थल पर उक्त गलियारे में आवेदक हरिश्चंद्र गुप्ता का हैंडपंप लगा हुआ है व कब्ज़ा दखल है। कब्जा दखल की पुष्टि 17 वर्ष पूर्व की है। जबकि सगीर अहमद आदि द्वारा उप जिला मजिस्ट्रेट सदर प्रतापगढ़ को गुमराह कर बताया जा रहा है कि हरिश्चंद्र गुप्ता कुछ दिन पूर्व गेट खोल लिया गया और हैंडपंप गाड़ दिया गया।
सच बात तो यह है कि आबादी के बीचोबीच राजस्व टीम को पैमाइश करने और स्वत्व निर्धारण करने का अधिकार ही नहीं है, फिर भी बिना अधिकार क्षेत्र के ही सिविल प्रकरण में जिस तरह हस्तेक्ष करके जबरन अपना निर्णय थोपते हैं, वह असंवैधानिक है। साथ ही सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में जबरन घुसकर एक तरह का कानूनी अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण करने जैसा है। सवाल यह उठता है कि जब 17 साल पहले उक्त प्रकरण में स्थलीय निरीक्षण और नायब तहसीलदार सिटी के नेतृत्व में पैमाइश हो चुकी है और संयुक्त आख्या प्रेषित की जा चुकी है तो अब फिर से उसकी पैमाइश कराने के औचित्य पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है।